ब्रांड नहीं, बेहतर तकनीक को तरजीह
टेंडर की शर्तों की होगी नए सिरे से समीक्षा
छह सदस्यीय उच्चस्तरीय उपसमिति करेगी तकनीकी मानकों, खरीद प्रक्रिया और पारदर्शिता की जांच
2026-27 के बजट से लेकर केंद्रीकृत-विकेंद्रीकृत खरीद मॉडल का भी अध्ययन
हुब्बल्ली। सरकारी स्कूलों और पीयू कॉलेजों में स्मार्ट क्लास स्थापित करने की करोड़ों रुपए की योजना अब उच्चस्तरीय समीक्षा के दायरे में आ गई है। शिक्षा विभाग ने परियोजना अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) से मंजूर स्मार्ट क्लास के क्रियान्वयन, तकनीकी मानकों और खरीद प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा के लिए छह सदस्यीय उच्चस्तरीय उपसमिति गठित की है।
समग्र शिक्षा कर्नाटक के राज्य परियोजना निदेशक समिति के अध्यक्ष होंगे। समिति मौजूदा तकनीकी मानकों को वर्तमान जरूरतों और भविष्य की तकनीक के अनुरूप बनाने के साथ पूरी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के उपाय सुझाएगी।
तकनीकी और नमूना परीक्षण में अटका टेंडर
सरकारी प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलों और पीयू कॉलेजों में डिजिटल आधारभूत ढांचा तथा स्मार्ट क्लास स्थापित करने के लिए पीएबी ने करोड़ों रुपए का अनुदान मंजूर किया है। इसके तहत समग्र शिक्षा कर्नाटक ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन तकनीकी और नमूना परीक्षण के चरण में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद सरकार ने मौजूदा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा का निर्णय लिया।
छह वरिष्ठ अधिकारियों की समिति
समिति में समग्र शिक्षा कर्नाटक के राज्य परियोजना निदेशक के अलावा प्री-यूनिवर्सिटी (पीयू) शिक्षा विभाग के निदेशक, समग्र शिक्षा कर्नाटक, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (ई-शासन), राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र और अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समग्र शिक्षा कर्नाटक के मुख्य लेखाधिकारी सदस्य सचिव होंगे।
किसी ब्रांड को नहीं मिलेगा फायदा
समिति स्मार्ट क्लास के तकनीकी मानकों में गुणवत्ता, टिकाऊपन, प्रदर्शन और विद्युत सुरक्षा से जुड़े बदलावों की सिफारिश करेगी। टेंडर दस्तावेजों में ऐसी शर्तें तय करने पर जोर रहेगा, जिससे किसी खास ब्रांड या निर्माता को अनुचित लाभ न मिले और सभी योग्य कंपनियों के लिए समान, तकनीक-तटस्थ तथा प्रतिस्पर्धी अवसर उपलब्ध हों।
खरीद मॉडल की भी होगी पड़ताल
समिति 2026-27 के बजट और डिजिटल हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर की खरीद के लिए केंद्रीकृत तथा विकेंद्रीकृत व्यवस्था के फायदे-नुकसान का अध्ययन करेगी। साथ ही केआरआईईएस, जवाहर नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालयों में अपनाए गए खरीद मॉडलों की समीक्षा कर सरकार को सिफारिश सौंपेगी।
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