‘पार्टिसिपेट मुंबई’ का लोकार्पण
उद्योग, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों को विकास से जोडऩे की पहल, बीएमसी सेवाओं में भी होगा बदलाव
मुंबई। मुंबई के विकास में अब सिर्फ सरकार और महानगरपालिका ही नहीं, बल्कि उद्योग, सामाजिक संस्थाएं और नागरिक भी सीधे भागीदार बनेंगे। इसी उद्देश्य से ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ डिजिटल मंच की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को इसका लोकार्पण किया। साथ ही बीएमसी और ‘समग्र’ संस्था के बीच प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और नागरिक सेवाओं को तेज बनाने के लिए समझौता हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मंच केवल सीएसआर निधि जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि यह तय करने का प्रयास है कि समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए मिलकर क्या किया जा सकता है। मंच पर शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, रोजगार, पर्यावरण, उद्यान, सौंदर्यीकरण और गरीबी उन्मूलन जैसी परियोजनाएं उपलब्ध रहेंगी। कंपनियां, स्वयंसेवी संस्थाएं और नागरिक अपनी पसंद की परियोजना चुनकर योगदान कर सकेंगे।
फडणवीस ने कहा कि सीएसआर में कितना पैसा खर्च हुआ, यह महत्वपूर्ण नहीं, उससे कितना लोककल्याण हुआ और क्या परिणाम मिला, यह असली कसौटी है। उन्होंने मुंबई में कुपोषण और बच्चों में अवरुद्ध विकास की समस्या पर सीएसआर भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई।
पुरानी फाइल संस्कृति पर प्रहार
समग्र के साथ करार को प्रशासनिक सुधार का अहम कदम बताते हुए फडणवीस ने कहा कि वर्षों पुरानी प्रक्रियाओं को बदलना जरूरी है। राज्य की करीब 1,100 ऑनलाइन सेवाओं की समीक्षा के बाद कम उपयोग वाली करीब 200 सेवाएं सामने आई हैं। अब अधिक उपयोग वाली 45-47 सेवाओं को सरल बनाने पर जोर है।
बीएमसी में निर्माण आराखड़ों (चित्रों) की जांच के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली शुरू हो चुकी है। महापौर रितू तावडे ने कहा कि सीएसआर का मतलब सिर्फ चेक देना नहीं, चेक नहीं, चेंज होना चाहिए।
10 सुविधा केंद्रों के लिए 25 करोड़
कार्यक्रम में हिंदुस्तान यूनिलीवर ने मुंबई में प्रस्तावित 10 नए सुविधा केंद्रों के लिए सीएसआर के तहत 25 करोड़ रुपए बीएमसी को सौंपे।
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