कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए सिबिल स्कोर बना रहा धारवाड़ का युवा

20 वर्षीय गौतम पाटील का नया प्रयोग

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों की विश्वसनीयता और जोखिम मापने की तैयारी

हुब्बल्ली। सपने देखने की उम्र नहीं होती—धारवाड़ के युवा गौतम आर. पाटील ने इसे साबित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। महज 20 वर्ष की उम्र में वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वायत्त प्रणालियों की विश्वसनीयता और जोखिम का आकलन कर सकेगी।

बीआईटीएस पिलानी में कंप्यूटर विज्ञान के छात्र गौतम ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के धीरज एस. के साथ मिलकर एक्सएजीआई लैब्स की स्थापना की है। उनका प्रमुख प्रयोग ट्रसकोर है। जिस तरह बैंक ऋण देने से पहले व्यक्ति की वित्तीय विश्वसनीयता जानने के लिए सिबिल स्कोर का सहारा लेते हैं, उसी तरह ट्रसकोर का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वायत्त प्रणालियों के जोखिम और विश्वसनीयता को मापना है।

गलत निर्णय का जोखिम भी बड़ा

आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियां वेबसाइट चलाने, कोड लिखने, सॉफ्टवेयर संचालित करने और संस्थागत सूचनाओं पर काम करने जैसे स्वायत्त कार्य कर रही हैं। इनके गलत निर्णय से साइबर सुरक्षा, आर्थिक नुकसान, नियमों के उल्लंघन और बीमा संबंधी विवाद जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ट्रसकोर ऐसे जोखिमों की जांच, दस्तावेजीकरण और मूल्यांकन पर केंद्रित है।

सोवा करेगा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परीक्षा

ट्रसकोर का सोवा तंत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वायत्त प्रणालियों के प्रदर्शन और संभावित जोखिमों की जांच करेगा। वहीं सोवा ट्रेस परीक्षण के दौरान इन प्रणालियों की गतिविधियों और मिले साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए विकसित किया जा रहा है। टीम इसे विमान के उड़ान अभिलेखक जैसी अवधारणा से जोड़ती है।

एक्सएजीआई लैब्स के अनुसार, कुछ ही महीनों में दो सार्वजनिक मुक्त-स्रोत भंडार, सुरक्षा परीक्षण तंत्र और पांच प्रायोगिक परियोजनाएं तैयार की गई हैं। कंपनी ने तकनीकी परीक्षणों में 91.2 प्रतिशत दीर्घकालिक स्मृति सटीकता और 94.4 प्रतिशत साक्ष्य कवरेज जैसे परिणाम मिलने का दावा किया है। ये कंपनी के आंतरिक परीक्षण हैं और इनके स्वतंत्र सत्यापन की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

गौतम का अगला लक्ष्य केवल जोखिम मूल्यांकन तक सीमित नहीं है। वे भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों के लिए बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराने वाले मॉडल की दिशा में भी बढऩा चाहते हैं।

बीमा सुरक्षा देने की दिशा में काम

हमारा लक्ष्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए सिबिल स्कोर जैसी व्यवस्था बनाना है। आगे इन प्रणालियों को सीधे बीमा सुरक्षा देने की दिशा में काम करना चाहते हैं।
–गौतम आर. पाटील, सह-संस्थापक, एक्सएजीआई लैब्स

 

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By Bharat Ki Awaz

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