किसान की जुगाड़ तकनीक ने बदली सिंचाई की तस्वीर, बाढ़ में भी सुरक्षित रहेगा पंपसेटजुगाड़ तकनीक से तैयार सिंचाई व्यवस्था की जानकारी देते युवा किसान वेंकटेश रेड्डी।

कंपनियों की 10 लाख रुपए की तकनीक महज डेढ़ लाख में तैयार

7-8 किलोमीटर दूर तक पानी पहुंचाने का दावा

महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश के किसान भी देखने पहुंच रहे

हुब्बल्ली। खेती में बढ़ती लागत और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता किसानों के सामने बड़ी चुनौती है। खासकर नदी और नालों के किनारे खेती करने वाले किसानों को हर साल बारिश के मौसम में एक अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ती है। नदी में बाढ़ आते ही पानी खींचने के लिए लगाए गए पंपसेट डूब जाते हैं या बह जाते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ सिंचाई व्यवस्था दोबारा तैयार करने का खर्च भी उठाना पड़ता है। लेकिन धारवाड़ जिले के नवलगुंद तालुक के सोटकनाल गांव के युवा किसान वेंकटेश रेड्डी ने अपनी तकनीकी सूझबूझ से इस समस्या का कम लागत वाला समाधान तैयार किया है।

उन्होंने ऐसी व्यवस्था विकसित की है, जिसमें बाढ़ का पानी बढऩे पर भी पंपसेट सुरक्षित रह सकता है। इस नवाचार की खासियत सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि कम खर्च में लंबी दूरी तक पानी पहुंचाने की क्षमता भी है।

जमीन के भीतर लगाया 12 इंच का पाइप

वेंकटेश रेड्डी ने 12 इंच का बड़ा पाइप जमीन में गाडक़र उसके भीतर सबमर्सिबल पंप लगाया है। इस व्यवस्था में पंप को सीधे नदी या नाले के किनारे खुले में रखने की जरूरत नहीं पड़ती। बाढ़ आने पर सामान्य पंपसेट की तरह उसके बहने या पानी में डूबकर खराब होने की आशंका कम हो जाती है।

इस तकनीक के जरिए लगातार अधिक मात्रा में पानी और ज्यादा दबाव के साथ 7 से 8 किलोमीटर दूर तक पहुंचाया जा सकता है। इससे दूर स्थित खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के अलावा तालाबों को भी कम समय में भरने में मदद मिल सकती है।

10 लाख का खर्च, किसान ने डेढ़ लाख में निकाला रास्ता

इस नवाचार का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी लागत है। कंपनियों के माध्यम से इसी तरह की व्यवस्था तैयार कराने पर करीब 5 से 10 लाख रुपए खर्च होते हैं। लेकिन वेंकटेश रेड्डी ने स्थानीय संसाधनों और अपनी तकनीकी समझ का इस्तेमाल कर इसे केवल 1 से 1.50 लाख रुपए में तैयार किया है।

खर्च का विवरण अनुमानित राशि

कंपनी से व्यवस्था स्थापित कराने का खर्च 5-10 लाख रुपए
किसान द्वारा तैयार व्यवस्था 1-1.50 लाख रुपए
संभावित बचत 3.50-8.50 लाख रुपए

इस हिसाब से किसान को स्थापना लागत में करीब 70 से 85 प्रतिशत तक बचत हो सकती है। हालांकि वास्तविक बचत पंप की क्षमता, पाइप की लंबाई और स्थापना स्थल के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

8 किलोमीटर दूर तक पानी, सिंचाई की नई संभावना

किसानों के लिए इस तकनीक का दूसरा बड़ा लाभ पानी को दूर तक पहुंचाने की क्षमता है। नदी या नाले के आसपास उपलब्ध जलस्रोत का उपयोग कर दूर स्थित खेतों तक पानी पहुंचाया जा सकता है। इससे उन किसानों को लाभ मिल सकता है, जिनके खेत जलस्रोत से दूर हैं और जिन्हें सिंचाई के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ती है।

तालाबों को कम समय में भरने की क्षमता से आसपास के क्षेत्रों में जल भंडारण और कृषि उपयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

दूसरे राज्यों के किसानों में भी जिज्ञासा

वेंकटेश रेड्डी का यह प्रयोग अब दूसरे राज्यों के किसानों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश से किसान सोटकनाल पहुंचकर इस व्यवस्था को देख रहे हैं। खास बात यह है कि रेड्डी अपनी तकनीक को इच्छुक किसानों के साथ नि:शुल्क साझा करने के लिए तैयार हैं। इससे दूसरे किसान भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कम खर्च में ऐसी व्यवस्था तैयार करने की जानकारी हासिल कर सकते हैं।

विशेषज्ञों के लिए जांच के बिंदु

इस तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाने से पहले पंप की हॉर्सपावर, प्रति घंटे पानी की मात्रा (डिस्चार्ज), 7-8 किलोमीटर दूरी पर दबाव, बिजली की खपत और बाढ़ के दौरान विद्युत सुरक्षा का तकनीकी परीक्षण जरूरी है। इससे किसानों को वास्तविक लागत और सिंचाई क्षमता का आकलन करने में मदद मिलेगी।

जानकारी नि:शुल्क साझा करने को तैयार

नदी और नालों में बाढ़ आने पर किसानों के पंपसेट डूबने या बह जाने से हर साल काफी नुकसान होता है। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए मैंने जमीन के भीतर 12 इंच का पाइप लगाकर उसमें पंप स्थापित करने की व्यवस्था बनाई। इसे तैयार करने में करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च हुए, जबकि कंपनी से ऐसी व्यवस्था बनवाने पर 5 से 10 लाख रुपए तक लग सकते हैं। इस तकनीक से 7-8 किलोमीटर दूर तक पानी पहुंचाया जा सकता है। मेरा प्रयास है कि कम खर्च में किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिले। इच्छुक किसान इस तकनीक को देखने और समझने के लिए आ सकते हैं। मैं इसकी जानकारी नि:शुल्क साझा करने को तैयार हूं।
–वेंकटेश रेड्डी, युवा किसान, सोटकनाल, नवलगुंद तालुक, धारवाड़ जिला

कृषि नवाचार की 5 खास बातें

85 परितशत तक संभावित लागत बचत

8 किमी तक पानी पहुंचाने की क्षमता

12 इंच जमीन में लगाया पाइप

1.5 लाख रुपए अधिकतम बताई गई लागत

 

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By Bharat Ki Awaz

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