विद्यार्थियों की टीम ने दिखाई तकनीकी प्रतिभा
इसरो की रोबोटिक्स चुनौती में आइआइआइटी धारवाड़ चौथे स्थान पर, दो लाख रुपए का पुरस्कार
धारवाड़. भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइआइटी) धारवाड़ की सात विद्यार्थियों वाली टीम च्आइकारसज् ने राष्ट्रीय स्तर की इसरो रोबोटिक्स चुनौती-२०२६ में चौथा स्थान हासिल कर संस्थान का गौरव बढ़ाया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की ओर से आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में टीम को दो लाख रुपए का नकद पुरस्कार मिला। विद्यार्थियों ने मंगल ग्रह जैसे दुर्गम वातावरण में बिना जीपीएस के काम करने में सक्षम स्वचालित मालवाहक ड्रोन विकसित कर अपनी तकनीकी दक्षता और नवाचार का परिचय दिया। संस्थान के प्रैक्टिस प्रोफेसर मल्लिकार्जुन कांडे ने मंगलवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता चार चरणों में यानी प्रारंभिक, पात्रता, निष्कासन और अंतिम दौर में आयोजित हुई। टीम च्आइकारसज् ने पहले तीन चरण सफलतापूर्वक पार कर अंतिम दौर में जगह बनाई। देशभर से अंतिम चरण के लिए चुनी गई २० टीमों में इसका चयन हुआ था। अंतिम मुकाबला बेंगलुरु स्थित यू.आर. राव उपग्रह केंद्र में आयोजित किया गया।
बिना जीपीएस के लक्ष्य पहचानने वाला ड्रोन
टीम ने प्रतियोगिता के लिए एक स्वचालित मालवाहक क्वाडकॉप्टर ड्रोन तैयार किया। इसे ऐसे क्षेत्र में काम करने के लिए विकसित किया गया, जहां जीपीएस सुविधा उपलब्ध न हो और वातावरण मंगल ग्रह की सतह जैसा चुनौतीपूर्ण हो। इस ड्रोन की खासियत यह है कि यह बिना मानवीय हस्तक्षेप के स्वयं रास्ता तय कर सकता है, निर्धारित लक्ष्यों की पहचान कर सकता है, आवश्यक कार्य पूरे कर सकता है और अंत में तय स्थान पर लौट सकता है। ऐसी क्षमता भविष्य में स्वचालित रोबोटिक्स, दुर्गम क्षेत्रों में माल पहुंचाने और अंतरिक्ष अभियानों से जुड़ी तकनीकों के विकास में उपयोगी हो सकती है।
आधुनिक तकनीकों का अनूठा संयोजन
ड्रोन के निर्माण में दृश्य और जड़त्वीय संवेदकों पर आधारित दिशा-निर्धारण, प्रकाशीय प्रवाह के आधार पर गति का आकलन तथा कंप्यूटर दृष्टि के जरिए लक्ष्य पहचानने जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। इन प्रणालियों को एक साथ जोडऩे, उनकी जांच करने और तकनीकी चुनौतियों को दूर करने में विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण काम किया। प्रतियोगिता के परिणाम अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह और पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में घोषित किए गए। यह कार्यक्रम अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र तथा इसरो के सहयोग से आयोजित हुआ था।
सात विद्यार्थियों की मेहनत को मिली पहचान
टीम आइकारस में जयेश पाटील, सक्षम गुप्ता, अश्विन जोसेफ, प्रियांशु मित्तल, रस्किन वर्मा, अंकित दाश और मोहम्मद रेहान शामिल हैं। इस परियोजना ने विद्यार्थियों को हार्डवेयर संयोजन, सॉफ्टवेयर विकास, स्वचालित दिशा-निर्धारण, कंप्यूटर दृष्टि, परीक्षण और वास्तविक परिस्थितियों में तकनीक लागू करने का व्यावहारिक अनुभव दिया। यह उपलब्धि विद्यार्थियों की तकनीकी समझ, सामूहिक प्रयास और नवाचार क्षमता को दर्शाती है। साथ ही, स्वचालित रोबोटिक्स, मानवरहित हवाई प्रणालियों और भविष्य की अंतरिक्ष तकनीकों के क्षेत्र में आइआइआइटी धारवाड़ की संभावनाओं को भी रेखांकित करती है।संवाददाता सम्मेलन में संस्थान के निदेशक प्रो. एस.आर. महादेव प्रसन्न, छात्र कल्याण प्रभारी प्रोफेसर के. गोपीनाथ, कुलसचिव सतीश अण्णिगेरी सहित संस्थान के कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित थे।
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