10 माह में सर्पदंश से 191 मौतें, कर्नाटक में बढ़ा खतरा

तीन साल में 49,965 लोग बने सर्पदंश के शिकार, 446 की मौत

लगातार दूसरे साल मृतकों की संख्या देश में सर्वाधिक

हुब्बल्ली। कर्नाटक में सर्पदंश अब गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। वर्ष 2026 के शुरुआती 10 महीनों में ही राज्य में 16,229 लोग सर्पदंश के शिकार हुए, जिनमें 191 लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में राज्य में सर्पदंश के 49,965 मामले सामने आए और 446 लोगों ने जान गंवाई।

वर्ष 2024 में 13,202 सर्पदंश के मामले सामने आए थे और 98 लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2025 में मामले बढक़र 20,634 हो गए और मृतकों की संख्या 157 तक पहुंच गई। इस वर्ष 10 अक्टूबर तक ही मृतकों की संख्या 191 हो चुकी है।

जंगल और ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा

मलेनाडु, तटीय कर्नाटक और उत्तर कर्नाटक के जंगलों से सटे ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। कोडगु, शिवमोग्गा, चिक्कमगलूरु, चामराजनगर और दक्षिण कन्नड़ प्रमुख प्रभावित जिलों में हैं। इसके अलावा बागलकोट, बल्लारी, बेलगावी, बेंगलूरु ग्रामीण, बीदर, चिक्कबल्लापुर, चित्रदुर्ग और दावणगेरे में भी बड़ी संख्या में मामले सामने आए हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, करीब 79 प्रतिशत लोगों को सांप ने पैर में, जबकि 19.2 प्रतिशत लोगों को शरीर के ऊपरी हिस्से में काटा।

इलाज में देरी पड़ रही भारी

दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में सर्पदंश के बाद पीडि़तों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती है। उपचार में देरी होने पर विष तेजी से फैल सकता है और स्थिति जानलेवा बन सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य केंद्रों, तालुक अस्पतालों और जिला अस्पतालों में सर्पविषरोधी दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। मौतों के कारणों की समीक्षा के लिए जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में मृत्यु-लेखा परीक्षण भी किया जा रहा है।

मौतों में कर्नाटक आगे, मामलों में पश्चिम बंगाल

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सर्पदंश से होने वाली मौतों के मामले में कर्नाटक लगातार दूसरे वर्ष देश में सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहा है। हालांकि, सर्पदंश के कुल मामलों में पश्चिम बंगाल पहले और कर्नाटक दूसरे स्थान पर है। तमिलनाडु, ओडिशा और असम भी अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल हैं।

इनका कहना है

पहले सर्पदंश के पीडि़तों को अस्पताल लाने की प्रवृत्ति कम थी, जिसके कारण कई मामले दर्ज नहीं हो पाते थे। शिवमोग्गा, कोडगु, चिक्कमगलूरु और चामराजनगर जैसे वन सीमावर्ती जिलों में सर्पदंश की घटनाएं अधिक सामने आती हैं।
–ऋत्विक रंजनम पांडे, प्रधान सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग

 

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By Bharat Ki Awaz

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