95 प्रतिशत से अधिक साक्षरता पर सरकार की मुहर, आधिकारिक घोषणा की तैयारी
155 ग्राम पंचायतों, सात तालुक पंचायतों और आठ शहरी निकायों में चला साक्षरता अभियान
घोषणा से पहले आंकड़ों की दोबारा जांच
उडुपी। शिक्षा के क्षेत्र में कर्नाटक के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि का रास्ता खुल गया है। राज्य सरकार ने उडुपी जिले को पूर्ण साक्षर जिला घोषित करने की मंजूरी दे दी है। ऐसा होने पर उडुपी कर्नाटक का पहला पूर्ण साक्षर जिला बनेगा। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने आदेश जारी कर जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को घोषणा की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का अधिकार दिया है।
यह उपलब्धि जिले में निरक्षरता दूर करने के लिए चलाए गए व्यापक अभियान का परिणाम है। केंद्र सरकार की उल्लास योजना, राज्य सरकार के एक हजार ग्राम पंचायत साक्षरता कार्यक्रम और जिला पंचायत की योजनाओं के तहत जिले की सभी 155 ग्राम पंचायतों, सात तालुक पंचायतों और आठ शहरी स्थानीय निकायों में साक्षरता अभियान चलाया गया। निरक्षर लोगों को पढऩा-लिखना और बुनियादी गणित सिखाने के साथ उनकी परीक्षाएं भी कराई गईं।
95 प्रतिशत साक्षरता का मानक
केंद्र सरकार के निर्धारित मानकों के अनुसार, 95 प्रतिशत या उससे अधिक साक्षरता दर वाले क्षेत्र को पूर्ण साक्षर माना जा सकता है। उडुपी की साक्षरता दर इस निर्धारित सीमा से अधिक होने की पुष्टि के आधार पर राज्य सरकार ने घोषणा की प्रक्रिया को मंजूरी दी है।
जमीनी स्तर पर प्राप्त प्रमाणपत्रों और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण विभाग की सिफारिश के बाद सरकार को अंतिम प्रस्ताव भेजा गया था। अब आधिकारिक घोषणा से पहले 2011 की जनगणना के आंकड़ों और बाद में चलाए गए साक्षरता कार्यक्रमों की प्रगति की दोबारा समीक्षा की जाएगी।
घोषणा के बाद भी जारी रहेगा अभियान
सरकार के निर्देशानुसार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समीक्षा पूरी होने के बाद जिला प्रभारी मंत्री से चर्चा कर घोषणा की तारीख तय करेंगे। कन्नड़ राज्योत्सव या किसी अन्य महत्वपूर्ण अवसर पर औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूर्ण साक्षर जिला घोषित होने के बाद भी अभियान नहीं थमेगा। शेष निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने, नवसाक्षरों के अभ्यास को जारी रखने और दूसरे राज्यों व जिलों से आने वाले निरक्षर प्रवासियों की पहचान कर उन्हें शिक्षा से जोडऩे के प्रयास जारी रखने होंगे।
उडुपी की यह पहल वयस्क शिक्षा और स्थानीय निकायों की भागीदारी का उदाहरण है। अब आंकड़ों की अंतिम समीक्षा और औपचारिक घोषणा के साथ जिले के इस लक्ष्य को आधिकारिक पहचान मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
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