चीनी मंत्री लमाणी का दावा—मूल्य निर्धारण का अधिकार केंद्र के पास
समिति बनाने का भरोसा, लेकिन किसान रिपोर्ट का इंतजार करने को तैयार नहीं
हावेरी। गन्ने के उचित मूल्य को लेकर कर्नाटक में किसान आंदोलन तेज है, लेकिन मूल्य निर्धारण की जिम्मेदारी को लेकर केंद्र और राज्य के बीच किसानों की उम्मीदें अटकी हुई हैं।
राज्य के चीनी मंत्री रुद्रप्पा लमाणी ने साफ कहा है कि गन्ने का दाम तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है और इसमें राज्य की कोई भूमिका नहीं है। केंद्र ने किसानों की समस्याओं पर विचार के लिए समिति बनाने का आश्वासन दिया है, लेकिन रिपोर्ट आने तक इंतजार करने के प्रस्ताव से किसान सहमत नहीं हैं। ऐसे में सवाल है कि गन्ना उत्पादकों को तत्काल राहत कब मिलेगी।
लमाणी ने कहा कि केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के आवास के सामने किसानों के प्रदर्शन के बाद दिल्ली में करीब चार घंटे तक बैठक हुई। केंद्रीय मंत्रियों जोशी और चौहान की अध्यक्षता में हुई चर्चा में राज्य की ओर से लमाणी के अलावा मंत्री सवदी और नरेंद्रस्वामी भी शामिल हुए।
मूल्य और तौल में गड़बड़ी पर चर्चा
बैठक में गन्ने के मूल्य निर्धारण, तौल में कथित गड़बड़ी और किसानों की अन्य समस्याओं पर विचार किया गया। किसानों ने गन्ने से प्राप्त चीनी को दो हिस्सों में बांटने तथा एक हिस्से का उपयोग ब्राउन शुगर बनाने और दूसरे का आम उपभोक्ताओं के लिए करने की मांग रखी। केंद्र ने मूल्य निर्धारण के लिए समिति गठित करने और उसकी रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, किसान तत्काल निर्णय चाहते हैं।
क्षेत्रवार चीनी की प्राप्ति से जटिलता
लमाणी के अनुसार, गन्ने की फसल को पकने में करीब 12 महीने लगते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में उससे प्राप्त चीनी की मात्रा में अंतर होता है। इसी आधार पर मूल्य निर्धारण जटिल हो जाता है। केंद्र के मंत्रियों ने किसानों की कुछ मांगों को पूरा करने में कठिनाई भी जताई है। समिति की रिपोर्ट के बाद फिर बैठक करने का भरोसा दिया गया है।
मंत्री ने कहा कि गन्ना उत्पादकों की समस्या देशव्यापी है और किसानों को अपनी मांगें मनवाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए। लेकिन आंदोलन के बीच समिति और अगली बैठक का आश्वासन किसानों के असंतोष को कितना शांत कर पाएगा, यह बड़ा सवाल है। फिलहाल, गन्ने के उचित मूल्य पर ठोस फैसले की मांग के बीच किसान केंद्र के निर्णय की राह देख रहे हैं।

