देश में लक्ष्य से महज 191 रूट किलोमीटर दूर रेलवे, 27 राज्यों में शत-प्रतिशत काम पूरा
कर्नाटक में 96.8 प्रतिशत विद्युतीकरण
असम और गोवा में भी अधूरा काम
कुंदापुर (उडुपी)। भारतीय रेलवे ब्रॉडगेज नेटवर्क के शत-प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुका है, लेकिन कर्नाटक अब भी इस दौड़ में पीछे है। देशभर में 70,502 रूट किलोमीटर रेल नेटवर्क में से 70,311 किलोमीटर पर विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। यानी लक्ष्य हासिल करने के लिए अब केवल 191 रूट किलोमीटर का काम शेष है। रेल मंत्रालय के 30 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक, असम और गोवा में काम पूरा होने के बाद ही देश का पूरा ब्रॉडगेज नेटवर्क विद्युतीकृत हो सकेगा।
कर्नाटक में 3.2 प्रतिशत काम बाकी
रेल मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, कर्नाटक के ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क का 96.8 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हुआ है। यानी राज्य में अभी 3.2 प्रतिशत काम बाकी है। असम में 3,743 रूट किलोमीटर नेटवर्क का 97.9 प्रतिशत और गोवा में 187 किलोमीटर में से 171 किलोमीटर यानी 91.4 प्रतिशत रेलमार्ग विद्युतीकृत हो चुका है। इन तीनों राज्यों में शेष काम पूरा करना रेलवे के राष्ट्रीय लक्ष्य की अंतिम चुनौती बना हुआ है।
27 राज्यों में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण
रेल मंत्रालय के अनुसार, 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ब्रॉडगेज नेटवर्क का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है। रेलवे ने परिचालन क्षमता बढ़ाने, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के उद्देश्य से विद्युतीकरण कार्य को मिशन मोड में आगे बढ़ाया है।
दक्षिण रेलवे ने हासिल की उपलब्धि
पिछले महीने दक्षिण रेलवे ने अपने 5,068 रूट किलोमीटर ब्रॉडगेज नेटवर्क का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया। पट्टुकोट्टई-कराईक्कुडी खंड के अंतिम 71 किलोमीटर हिस्से में काम पूरा होने के साथ यह उपलब्धि हासिल हुई।
देश में रेलवे विद्युतीकरण की शुरुआत 1925 में हुई थी। उस समय मुंबई के विक्टोरिया टर्मिनस और कुर्ला हार्बर के बीच पहली विद्युत ट्रेन 1,500 वोल्ट प्रत्यक्ष धारा प्रणाली पर चलाई गई थी।
इनका कहना है
विद्युतीकरण से रेल परिचालन अधिक प्रभावी बनाने, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और सतत विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
–विवेक नायक, संचालक, रेलवे हितरक्षा समिति, कुंदापुर
