23 किलोमीटर के बीआरटीएस मार्ग पर नई परिवहन व्यवस्था की योजना, तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता का होगा अध्ययन
हुब्बल्ली। हुब्बल्ली-धारवाड़ के बीच यात्रियों को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा देने के लिए सरकार ट्राम सेवा शुरू करने पर विचार कर रही है। नगर विकास विभाग के शहरी भूमि परिवहन निदेशालय ने मौजूदा 23 किलोमीटर लंबे बीआरटीएस मार्ग पर आधुनिक, वातानुकूलित ट्राम चलाने की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का अध्ययन कराने की पहल की है। योजना व्यवहार्य पाई गई और लागू हुई तो दोनों शहरों को आधुनिक ट्राम सेवा वाले देश के पहले शहरों में शामिल होने का अवसर मिल सकता है।
विदेशों में है ट्राम
फ्रांस, जर्मनी और स्विट्जरलैंड सहित कई यूरोपीय देशों के प्रमुख शहरों में आधुनिक ट्राम सेवा चलती है। सडक़ पर बिछी पटरियों पर चलने वाली विद्युत चालित ट्राम में दो से पांच डिब्बे लगाए जा सकते हैं। इससे एक साथ अधिक यात्रियों को ले जाना संभव होगा। साथ ही, बसों की तुलना में प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।
रोजाना एक लाख से अधिक यात्री
हुब्बल्ली-धारवाड़ के बीच मौजूदा बीआरटीएस मार्ग पर चलने वाली चिगरी बसों से प्रतिदिन एक लाख से अधिक लोग यात्रा करते हैं। ट्राम सेवा शुरू होने पर इसी मार्ग पर अधिक यात्रियों को परिवहन सुविधा देने की संभावना है। योजना के पक्ष में यह भी तर्क दिया जा रहा है कि मौजूदा मार्ग का इस्तेमाल होने से नई व्यवस्था लागू करने में आसानी हो सकती है।
मेट्रो से कम हो सकता है किराया
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ट्राम के परिचालन और रखरखाव का खर्च मेट्रो रेल की तुलना में कम हो सकता है। इससे यात्रियों को अपेक्षाकृत कम किराए पर सफर की सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना की वास्तविक लागत, यात्री क्षमता और दीर्घकालीन आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन अध्ययन के बाद ही हो सकेगा।
कोलकाता में पहले से है ट्राम
देश में पश्चिम बंगाल के कोलकाता में पुरानी ट्राम सेवा मौजूद है। हुब्बल्ली-धारवाड़ में प्रस्तावित योजना आधुनिक ट्राम व्यवस्था पर केंद्रित है। इसकी मंजूरी और क्रियान्वयन का फैसला व्यवहार्यता अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर होगा।
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