दो सप्ताह से अधिक खांसी को नजरअंदाज न करें
लक्षण वाले लोगों की जांच कराना सभी की जिम्मेदारी
हुब्बल्ली। जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. परशुराम एफ.के. ने कहा कि क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। सभी विभाग और समुदाय मिलकर काम करें, तभी टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
वे जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सभागार में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत आयोजित सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान के जिला स्तरीय साझेदार प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन जिला प्रशासन, जिला पंचायत, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, जिला क्षय रोग उन्मूलन विभाग और स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
दो सप्ताह की खांसी को न करें नजरअंदाज
डॉ. परशुराम ने कहा कि टीबी माइकोबैक्टीरियम से होने वाला संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। समय पर पहचान और उचित उपचार से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, वजन या भूख कम होना तथा बलगम में खून आना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तत्काल निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए।
मरीजों से दूरी नहीं, सहयोग जरूरी
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारी अपने कर्मचारियों और आम लोगों के बीच टीबी को लेकर जागरूकता बढ़ाएं। बीमारी से जुड़े भ्रम और सामाजिक कलंक को दूर करना भी जरूरी है। टीबी मरीजों को अलग-थलग करने के बजाय मानसिक सहयोग देकर उपचार पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
जिला क्षय रोग उन्मूलन अधिकारी डॉ. रवींद्र बोवेर ने कहा कि सक्रिय खोज अभियान का उद्देश्य मरीजों के अस्पताल पहुंचने का इंतजार करने के बजाय समुदाय में ही संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उनकी जांच और उपचार सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी विभागों से अभियान में सहयोग की अपील की।
बचाव के उपाय भी जरूरी
उन्होंने कहा कि खांसते समय मुंह-नाक ढकना, पर्याप्त हवा आने-जाने वाले स्थानों में रहना और लंबे समय तक खांसी होने पर जांच कराना जरूरी है। विभिन्न विभागों को अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर संदिग्ध मामलों को स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाने में सहयोग करने को कहा गया।
कार्यक्रम में जिला आरसीएच अधिकारी डॉ. संजय डुम्मगोल, जिला रोगवाहक आश्रित रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. मंजुनाथ एस., जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी बी.आर. पात्रोट, महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक वीरन्नागौड़ा पाटील, सार्वजनिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक एस.एन. हुडेदमनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, आशा पर्यवेक्षक और कार्यक्रम समन्वयक मौजूद थे।
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

