मनरेगा में 44 दिनों में 2.04 करोड़ मानव दिवस का रोजगारईश्वर बी. खंड्रे।

पिछले साल की तुलना में 33 लाख अधिक मानव दिवस सृजित

रायचूर अव्वल, 87 हजार से अधिक नए जॉब कार्ड जारी

हुब्बल्ली। बारिश की कमी के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की जरूरत बढऩे से कर्नाटक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) (वर्तमान में वीबी-जी राम जी योजना) के तहत रोजगार सृजन में वृद्धि दर्ज की गई है। एक जुलाई से 13 अगस्त तक 44 दिनों में राज्य में 2.04 करोड़ मानव दिवस का रोजगार सृजित किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 1.71 करोड़ मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया था। इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 33 लाख अधिक मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ।

ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे के अनुसार, इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव और बारिश की कमी के बीच ग्रामीण गरीबों, भूमिहीन मजदूरों, दलितों तथा वंचित वर्गों को रोजगार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य गांवों में ही काम देकर ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सहारा देना और रोजगार के लिए पलायन रोकना है।

रायचूर में सबसे अधिक रोजगार

जिलावार आंकड़ों में रायचूर 24 लाख मानव दिवस के साथ पहले स्थान पर रहा। बीदर में 21 लाख और कोप्पल में 18 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ। पिछले वर्ष की तुलना में रोजगार सृजन की वृद्धि दर विजयनगर जिले में 340 प्रतिशत रही। कलबुर्गी में 257 प्रतिशत, कोप्पल में 207 प्रतिशत, बल्लारी में 175 प्रतिशत और बीदर में 173 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

87 हजार से अधिक नए जॉब कार्ड

योजना के तहत पात्र परिवारों को जोडऩे के लिए ई-केवाईसी और नए जॉब कार्ड जारी करने के विशेष शिविर लगाए गए। इस वर्ष राज्य में 87,164 से अधिक नए जॉब कार्ड जारी किए गए हैं। इससे ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार पाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

जल संरक्षण और ग्रामीण विकास पर जोर

मनरेगा के तहत तालाबों से गाद निकालने, नहरों और जलाशयों के पुनरुद्धार, सामाजिक वानिकी, कृषि तालाब, पशु शेड, खाद के गड्ढे, मिट्टी कटाव रोकने के लिए सुरक्षा दीवारों और संपर्क सडक़ों जैसे कार्य कराए जा रहे हैं। इन कार्यों के जरिए रोजगार उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है।

125 दिन के रोजगार का प्रावधान

मंत्री के अनुसार, योजना के तहत प्रति ग्रामीण परिवार सालाना अधिकतम 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। 382 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी के हिसाब से पूरे 125 दिन काम मिलने पर एक परिवार अधिकतम 47,750 रुपए कमा सकता है। योजना में महिला और पुरुष श्रमिकों के लिए समान मजदूरी निर्धारित है।

रोजगार सृजन में वृद्धि के बीच चुनौती यह है कि काम मांगने वाले पात्र परिवारों को समय पर रोजगार मिले और जल संरक्षण व ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों का लाभ लंबे समय तक मिल सके।

 

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