चीनी मिल मालिकों पर बरसे मुख्यमंत्री
गन्ना मूल्य विवाद पर दोटूक सवाल
पूरा सरकार तंत्र आपके सामने बैठा है, किसानों को बचाने का रास्ता निकालिए
बेलगावी। गन्ना किसानों के मूल्य विवाद पर बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सोमवार को चीनी मिल मालिकों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने सवाल किया कि जब किसानों को उनके साथ की जरूरत थी, तब मिल मालिक कहां थे? किसानों का विश्वास जीतने में विफल रहने पर मिल मालिकों को घेरते हुए उन्होंने साफ कहा कि किसानों को राहत देने की जिम्मेदारी केवल राज्य सरकार की नहीं, बल्कि चीनी मिलों और केंद्र सरकार की भी है।
सुवर्ण विधानसौधा में चीनी मिल मालिकों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री का तेवर सख्त रहा। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ खड़े होने की जिम्मेदारी मिल मालिकों और केंद्र सरकार की थी, लेकिन अब राज्य सरकार को बीच में आकर समस्या सुलझानी पड़ रही है। पूरा सरकार तंत्र आपके सामने बैठा है। कोई समाधान निकालिए और किसानों को बचाइए।
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि गन्ना मूल्य को लेकर किसानों के आंदोलन के दौरान राज्य सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा और कित्तूर जाकर उनकी शिकायतें सुननी पड़ीं। उनके मुताबिक, किसानों और चीनी मिलों के बीच विश्वास का रिश्ता कमजोर हुआ है। मिल मालिकों को किसानों की मांगों और उनकी परेशानियों के प्रति अधिक जिम्मेदारी दिखानी चाहिए थी।
6,000 रुपए प्रति टन की मांग से बढ़ा दबाव
बैठक में गन्ने का मूल्य 6,000 रुपए प्रति टन करने की मांग का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की ओर से इस मांग को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने चीनी के दाम में पिछले दस वर्षों से वृद्धि नहीं होने की बात का उल्लेख करते हुए मिलों की समस्याओं और किसानों की मांगों के बीच समाधान तलाशने पर जोर दिया।
उन्होंने बैठक में स्पष्ट कर दिया कि यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति करने के लिए अलग मंच है। यहां समाधान निकालकर किसानों को राहत देनी है। उनके इस रुख से बैठक में मिल मालिकों पर किसानों की मांगों का जवाब देने का दबाव साफ दिखाई दिया।
बैठने की व्यवस्था पर भी भिड़े नेता
बैठक में किसानों के मुद्दे के साथ ही बैठने की व्यवस्था को लेकर भी विवाद हुआ। चीनी मिल मालिक प्रभाकर कोरे ने अतिरिक्त जिलाधिकारी विजयकुमार होनकेरी पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि विधायकों और सांसदों को आगे बैठाया गया, जबकि मिल मालिकों को पीछे क्यों जगह दी गई। उन्होंने व्यवस्था नहीं बदलने पर बैठक के बहिष्कार की चेतावनी दी।
भाजपा विधायक अरविंद बेल्लद ने भी सांसद प्रियंका जारकीहोली के मंच पर बैठने का मुद्दा उठाया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक को राजनीति का मंच न बनाया जाए। उन्होंने सवाल किया कि एक महिला मंच पर बैठ गई तो इसमें क्या आपत्ति है? इसके बाद प्रियंका जारकीहोली स्वयं मंच से नीचे उतर गईं। बाद में मिल मालिकों के लिए भी आगे की पंक्ति में बैठने की व्यवस्था की गई।
सुबह 11 बजे निर्धारित बैठक में मुख्यमंत्री दोपहर 12.26 बजे पहुंचे। बैठक में देरी और बैठने की व्यवस्था को लेकर उठे विवाद के बीच गन्ना मूल्य का मूल सवाल केंद्र में रहा कि किसानों को राहत देने के लिए मिल मालिक और सरकारें क्या समाधान निकालेंगी।
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