मोदी और जोशी को लिखा पत्र
चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 41.50 रुपए प्रति किलो करने और गन्ने की एफआरपी में बदलाव की मांग
हुब्बल्ली। गन्ने के दाम को लेकर कर्नाटक में किसानों का आंदोलन उग्र होने के बीच राज्य सरकार ने अब केंद्र पर दबाव बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखकर गन्ने की एफआरपी में संशोधन, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 से बढ़ाकर 41.50 रुपए प्रति किलो करने और एथेनॉल नीति में बदलाव की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि केंद्र के तत्काल फैसले के बिना किसानों की मूल्य संबंधी मांगों और चीनी मिलों के सामने खड़े संकट का समाधान मुश्किल है।
शिवकुमार ने पत्र में कहा कि राज्य के 226 तालुकों में सूखे की स्थिति से गन्ने की पैदावार प्रभावित होने और किसानों की आर्थिक मुश्किलें बढऩे की आशंका है। उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार उत्पादन की व्यापक लागत (सी2) पर 50 प्रतिशत लाभ जोडक़र गन्ने का मूल्य तय करने की मांग का समर्थन किया है। किसान इसी आधार पर गन्ने का दाम 5,500 रुपए प्रति टन करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही एफआरपी की आधारभूत रिकवरी दर 10.25 प्रतिशत से घटाकर 9.5 प्रतिशत करने का सुझाव दिया गया है।
चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 41.50 रुपए करने की सिफारिश
पत्र के अनुसार, 14 फरवरी 2019 से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपए प्रति किलो पर स्थिर है, जबकि इसी अवधि में गन्ने की एफआरपी 2,750 से बढक़र 3,650 रुपए प्रति टन हो गई है। बाजार में चीनी की कीमत करीब 45 रुपए प्रति किलो होने के आधार पर राज्य सरकार ने न्यूनतम बिक्री मूल्य 41.50 रुपए प्रति किलो करने की सिफारिश की है। घरेलू और व्यावसायिक उपयोग की चीनी के लिए अलग-अलग दरें तय करने का सुझाव भी दिया गया है।
एथेनॉल के दाम और आवंटन में बदलाव की मांग
शिवकुमार ने कर्नाटक की एथेनॉल उत्पादन क्षमता के अनुरूप अधिक आवंटन देने की मांग की है। राज्य में गन्ने और शीरे से एथेनॉल उत्पादन की क्षमता करीब 225 करोड़ लीटर है, जबकि 2025-26 में केवल 117 करोड़ लीटर का आवंटन मिला। वर्ष 2022-23 से गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से बनने वाले एथेनॉल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। राज्य सरकार ने एथेनॉल की विभिन्न श्रेणियों के लिए 73, 67 और 61 रुपए प्रति लीटर की दरें तय करने का सुझाव दिया है।
पत्र में एथेनॉल और सह-विद्युत उत्पादन से होने वाली आय में किसानों को उचित हिस्सेदारी देने के लिए आय-बंटवारा व्यवस्था की समीक्षा तथा मूल्य स्थिरीकरण कोष बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
मौजूदा पेराई सत्र के लिए तत्काल फैसले का आग्रह
शिवकुमार के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 तक पिछले पेराई सत्र के गन्ना बकाए का 99.85 प्रतिशत भुगतान हो चुका था। पिछले सत्र में मिलों ने किसानों को एफआरपी से 500 से 600 रुपए प्रति टन अधिक भुगतान किया था। राज्य सरकार ने भी 100 रुपए प्रति टन के हिसाब से कुल 290 करोड़ रुपए दिए थे।
26 अक्टूबर को सुवर्ण विधानसौधा में किसान नेताओं और चीनी मिल प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि मिलों ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में वृद्धि का लाभ किसानों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। शिवकुमार ने केंद्र से समिति की सिफारिशें आने तक मौजूदा पेराई सत्र के लिए चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने, एथेनॉल नीति की समीक्षा करने और गन्ने की कटाई व परिवहन खर्च को शामिल करने तथा अलग रखने—दोनों आधारों पर एफआरपी तय करने के विकल्पों पर विचार करने की अपील की है।
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