यूपीआई पर शुल्क के प्रस्ताव का अन्नामलाई ने किया विरोध
भाजपा के गढ़ उडुपी से छोटे व्यापारियों के पक्ष में उठाई आवाज
उडुपी। यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव को लेकर पूर्व आईपीएस अधिकारी और भाजपा नेता के. अन्नामलाई ने केंद्र सरकार को आगाह किया है। उन्होंने कहा कि यूपीआई सोने के अंडे देने वाली मुर्गी की तरह है। तत्काल कमाई के लालच में इसे नुकसान पहुंचाना देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए घातक हो सकता है। भाजपा के मजबूत जनाधार वाले उडुपी में केंद्र की आर्थिक नीति पर उनकी यह टिप्पणी चर्चा का विषय बनी है।
अज्जरकाडु टाउन हॉल में ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन के राज्यस्तरीय व्यापारी सम्मेलन में अन्नामलाई ने यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लगाने के प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि मुफ्त लेनदेन के भरोसे ही देश के गांवों से लेकर शहरों तक लोगों ने डिजिटल भुगतान को अपनाया है। ऐसे में शुल्क लगाने से छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है तथा डिजिटल भुगतान का विस्तार प्रभावित हो सकता है।
15 हजार करोड़ के लिए व्यवस्था को जोखिम में न डालें
अन्नामलाई ने कहा कि करीब 50 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश करने वाली केंद्र सरकार के लिए यूपीआई शुल्क से अनुमानित 15 हजार करोड़ रुपए की आय इतनी बड़ी नहीं है कि इसके लिए डिजिटल भुगतान व्यवस्था को जोखिम में डाला जाए। डिजिटल ढांचे पर होने वाले खर्च को बोझ के बजाय आर्थिक विकास में निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए। छोटे व्यापारियों पर शुल्क का भार डालने के बजाय सरकार को इस व्यवस्था को समर्थन देना चाहिए।
मेक इन इंडिया के साथ मेक फॉर इंडिया भी जरूरी
स्थानीय व्यापारियों के पक्ष में बोलते हुए अन्नामलाई ने कहा कि छोटे कारोबारी रोजगार पैदा करते हैं और अपनी कमाई स्थानीय अर्थ व्यवस्था में लगाते हैं। इसके विपरीत, बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मुनाफा विदेश जा सकता है। उन्होंने विदेशी कंपनियों पर अत्यधिक निर्भरता को जोखिमपूर्ण बताते हुए मेक इन इंडिया के साथ मेक फॉर इंडिया की अवधारणा को भी बढ़ावा देने की जरूरत जताई।
विकास बेंगलूरु तक सीमित न रहे
कर्नाटक की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए अन्नामलाई ने कहा कि विकास केवल बेंगलूरु तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तटीय क्षेत्र समेत राज्य के सभी हिस्सों तक पहुंचना चाहिए। राजनीतिक दलों को मुफ्त योजनाओं की घोषणाओं और पोस्टरबाजी से आगे बढक़र वास्तविक विकास तथा प्रशासनिक सुधारों के आधार पर प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए।
उडुपी में दिए गए इन बयानों के जरिए अन्नामलाई ने छोटे व्यापारियों के हित, डिजिटल भुगतान की निरंतरता और संतुलित क्षेत्रीय विकास को प्रमुखता दी।
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