गन्ना किसानों को फिलहाल राहत नहींमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार।

केंद्र की समिति की रिपोर्ट का इंतजार

शिवकुमार बोले—चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढऩे पर ही अतिरिक्त भुगतान संभव

एसएपी की मांग पर अड़े किसान

बेलगावी। कर्नाटक में गन्ने के उचित मूल्य की मांग को लेकर जारी किसानों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने तत्काल राहत देने में असमर्थता जताई। उन्होंने कहा कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढऩे तक किसानों को अतिरिक्त भुगतान करना संभव नहीं है। केंद्र सरकार की समिति 29 नवंबर को कर्नाटक आएगी। उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा।

सोमवार को सुवर्ण विधानसौधा में किसानों के साथ बैठक में शिवकुमार ने कहा कि वे केंद्र की समिति के सामने किसानों का पक्ष रखेंगे और महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा कर केंद्र पर दबाव बनाएंगे। चीनी मिल मालिकों ने भी चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढऩे पर किसानों को अधिक भुगतान की संभावना जताई है।

उत्पादन घटा, लागत बढ़ी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साल मिल मालिकों से चर्चा के बाद गन्ने पर 300 रुपए अतिरिक्त भुगतान का निर्णय लिया गया था। इस साल गन्ने की उपज और चीनी उत्पादन में गिरावट आई है। एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल से जुड़े केंद्र के फैसले, बढ़ती उत्पादन लागत और चीनी की कीमतों में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने से मिलों पर दबाव है।

उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि सूखे और बिजली की कमी से खर्च बढ़ा है। किसानों के पंपसेटों के लिए बिजली पर करीब 22,000 करोड़ रुपए और गृह ज्योति योजना पर 7,000 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। सूखे के कारण इस साल करीब 9,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पडऩे का अनुमान है।

एसएपी घोषित करने की मांग

मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद किसान राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) घोषित करने की मांग पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि केंद्र की समिति की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना राज्य सरकार को किसानों के हित में निर्णय लेना चाहिए। मांग पूरी होने तक सुवर्ण विधानसौधा से नहीं हटने की चेतावनी भी दी गई।

विधायक दर्शन पुट्टण्णय्या ने कहा कि किसानों को फसल उगाने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उपज का मूल्य तय करने में उनकी भूमिका सीमित है। उन्होंने गन्ने की कीमत तय करने की व्यवस्था में बदलाव, आंदोलनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने, सहकारी चीनी मिलों को बचाने और किसानों के कर्ज माफ करने की मांग की।

 

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By Bharat Ki Awaz

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