महाराष्ट्र की 19 हजार करोड़ की परियोजना से आलमट्टी बांध में पानी की आवक प्रभावित होने की आशंका
एम.बी. पाटील ने उठाए सवाल, सर्वदलीय बैठक बुलाने की तैयारी
विजयपुर। कृष्णा नदी के 40 टीएमसी फीट बाढ़ के पानी को भीमा नदी की ओर मोडऩे की महाराष्ट्र की प्रस्तावित योजना ने कर्नाटक की चिंता बढ़ा दी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान के बाद कर्नाटक सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। भारी एवं मध्यम उद्योग मंत्री तथा विजयपुर जिला प्रभारी मंत्री एम.बी. पाटील ने पत्रकारों से बातचीत में परियोजना पर आपत्ति जताते हुए अंतरराज्यीय जल बंटवारे के नियमों पर सवाल उठाए।
पाटील के अनुसार, महाराष्ट्र महाबलेश्वर के निकट कृष्णा नदी से 40 टीएमसी फीट पानी निकालकर भीमा नदी के उज्जनी जलाशय तक पहुंचाने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य मराठवाड़ा के दो जिलों के अलावा सांगली और सोलापुर को पानी उपलब्ध कराना है।
19 हजार करोड़ रुपए की परियोजना
मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2026 में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए 24 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। करीब 84 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित मार्ग का भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण किया जा रहा है। वर्ष 2026 के अंत तक डीपीआर तैयार होने की संभावना है। परियोजना की अनुमानित लागत 19 हजार करोड़ रुपए है। इसके लिए विश्व बैंक से वित्तीय सहायता लेने की बात भी सामने आई है।
जल बंटवारे के नियमों पर सवाल
पाटील ने कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण-द्वितीय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि महाराष्ट्र को 81 टीएमसी, कर्नाटक को 173 टीएमसी और अविभाजित आंध्र प्रदेश को 194 टीएमसी फीट पानी आवंटित किया गया है। उन्होंने कहा कि निर्धारित जल बंटवारे और अंतरराज्यीय नियमों के संदर्भ में महाराष्ट्र की प्रस्तावित योजना की जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण का फैसला अभी केंद्र सरकार के राजपत्र में अधिसूचित नहीं हुआ है। इसी आधार पर केंद्र कर्नाटक की कृष्णा ऊपरी घाटी परियोजना के तीसरे चरण की डीपीआर को बार-बार लौटा रहा है। ऐसे में महाराष्ट्र की परियोजना को मिलने वाली मंजूरियों और विश्व बैंक की संभावित सहायता पर केंद्र को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
आलमट्टी जलाशय की आवक पर पड़ सकता है असर
पाटील ने आशंका जताई कि कृष्णा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र से 40 टीएमसी फीट पानी मोडऩे पर आलमट्टी जलाशय में पानी की आवक प्रभावित हो सकती है। इसका असर कर्नाटक के अलावा तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के जल हितों पर भी पड़ सकता है।
सर्वदलीय बैठक बुलाने की तैयारी
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ इस विषय पर चर्चा कर उनके नेतृत्व में सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी। साथ ही केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगने और राज्य के सिंचाई हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाने की तैयारी है।
परियोजना के प्रमुख आंकड़े
विवरण — प्रस्तावित योजना
पानी मोडऩे की मात्रा — 40 टीएमसी फीट
अनुमानित लागत — 19,000 करोड़ रुपए
डीपीआर के लिए मंजूरी — 24 करोड़ रुपए
प्रस्तावित मार्ग — 84 किलोमीटर
गंतव्य — उज्जनी जलाशय, भीमा नदी
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