आलमट्टी-चित्रदुर्ग नई रेल लाइन पर फिर बढ़ी उम्मीदआलमट्टी-चित्रदुर्ग नई रेल लाइन की मांग को लेकर राज्यसभा सदस्य नारायणसा बांडगे को ज्ञापन सौंपते हुए कुष्टगी रेलवे होराटा (संघर्ष) समिति के सदस्य।

शीतकालीन सत्र में होगी प्रमुख मांग

राज्यसभा सदस्य नारायणसा बांडगे का आश्वासन

अगले बजट में अनुदान की तैयारी

कुष्टगी (कोप्पल). बहुप्रतीक्षित आलमट्टी-चित्रदुर्ग नई रेल लाइन परियोजना को लेकर क्षेत्र में एक बार फिर उम्मीदें जाग उठी हैं। राज्यसभा सदस्य नारायणसा बांडगे ने स्पष्ट किया कि 1 दिसंबर से शुरू होने वाले शीतकालीन संसद सत्र में इस रेलमार्ग को मुख्य मांग के रूप में जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।

उन्होंने कुष्टगी रेलवे होराटा (संघर्ष) समिति की ओर से सौंपे गए ज्ञापन को स्वीकार कर कहा कि आगामी केंद्रीय बजट में इस परियोजना के लिए विशेष अनुदान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।

बांडगे ने कहा कि यह रेल लाइन वर्षों पहले ही शुरू हो जानी चाहिए थी। यह मार्ग बन जाने पर बागलकोट, विजयपुर, कोप्पल, विजयनगर और चित्रदुर्ग जिलों से होकर बेंगलूरु तक सीधा, कम दूरी वाला मार्ग उपलब्ध होगा। इससे लाखों यात्रियों को सुविधा मिलेगी। यह जनता की प्रमुख मांग है और आगामी सत्र में इसे प्रबल रूप से उठाया जाएगा।

रेलवे होराटा समिति के कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र बंगारशेट्टर ने कहा कि पिछली संसद सत्र के दौरान ही इस मुद्दे पर अश्विनी वैष्णव, प्रल्हाद जोशी और वी. सोमन्ना को ज्ञापन सौंपा गया था।

अब उम्मीद है कि फरवरी में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से प्रस्तुत होने वाले केंद्रीय बजट में इस परियोजना के लिए पूर्ण अनुदान दिया जाएगा, जिससे निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके।

इस मार्ग के प्रारंभ होते ही कुष्टगी को एक और नया रेल मार्ग मिलेगा तथा कुष्टगी-बेंगलूरु सीधी रेल सेवा का वर्षों पुराना सपना साकार होने की संभावना है।

बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता जगदीश बुदिहाल, अशोक लिम्बावली, बी.एम. जोशी, बाबु घोर्पडे, शांताराज गोगी और कुमार बडिगेर सहित कई प्रतिनिधि उपस्थित थे।

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *