सीमा क्षेत्र की सरकारी स्कूल ने निजी संस्थानों को दी चुनौतीकोट्टलकी गांव की सरकारी कन्नड़ उच्च प्राथमिक विद्यालय।

मुख्याध्यापक ने बच्चों के नाम पर एफडी कर शुरू किया अनोखा प्रयोग

बेलगावी. आज जब सरकारी स्कूलों को अक्सर कमतर आंका जाता है, तब कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा पर स्थित एक सरकारी स्कूल ने निजी संस्थानों को कड़ी चुनौती दी है। मराठी प्रभाव वाले क्षेत्र में यह स्कूल न केवल बच्चों की संख्या बढ़ा रहा है, बल्कि कन्नड़ शिक्षा का परचम भी लहरा रहा है।

अथणी तालुक के तेलसंग होबली (राजस्व केंद्र) के कोट्टलकी गांव की सरकारी कन्नड़ उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 7 तक 134 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। मुख्याध्यापक (हेड मास्टर) अप्पासाहेब पाटील और सहायक शिक्षक संगमेश हत्तरकिहाल ने अपने अनोखे प्रयोगों से स्कूल को लोकप्रिय बना दिया है।

एफडी योजना

मुख्याध्यापक पाटील ने 2025-26 शैक्षणिक वर्ष से नए दाखिले लेने वाले प्रत्येक बच्चे के नाम पर स्वयं 1,111 रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) कर उसकी रसीद अभिभावकों को देने की पहल की है। अगले वर्ष भी यही योजना लागू करने की घोषणा की गई है।

शैक्षणिक सामग्री और पोशाक

प्रत्येक छात्र को किताबें, पेन, बैग जैसी सामग्री मुफ्त दी जाती है। सहायक शिक्षक हत्तरकिहाल ने अपने खर्च से सभी बच्चों को निजी स्कूलों की तरह ट्रैक सूट उपलब्ध कराए हैं।

पौष्टिक भोजन और मिठाई

मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को पौष्टिक भोजन के साथ महीने में एक बार विशेष मिठाई और विविध व्यंजन जैसे शेंगा होळीगे (मूंगफली की पूडी), पूड़ी, जामून, इडली-वड़ा, बाजरे की रोटी, जीरा राइस और दूध परोसा जाता है।

जनसहयोग

शिक्षकों की सेवा भावना से प्रेरित होकर ग्रामीणों ने स्कूल को फ्रिज, स्मार्ट बोर्ड, लैपटॉप, प्रिंटर और साउंड सिस्टम दान किए हैं।

मुख्याध्यापक पाटील का कहना है कि मिड-डे मील योजना में ही हम विशेष भोजन तैयार करते हैं, इसके लिए अलग धन की आवश्यकता नहीं। ईमानदारी से काम करने की नीयत हो तो सब संभव है।

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By Bharat Ki Awaz

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