गड्ढों में तब्दील सडक़ें, कचरे के ढेर और अंधेरे में आवाजाही
500 से अधिक उद्योग परेशान
हुब्बल्ली। धारवाड़ शहर का बेलूर औद्योगिक क्षेत्र इन दिनों बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। जगह-जगह खराब सडक़ें, अव्यवस्थित कचरा निस्तारण, जर्जर नालियां और स्ट्रीट लाइट की कमी के कारण करीब 2,065 एकड़ में फैला यह औद्योगिक क्षेत्र बदहाली का शिकार है। यहां 500 से अधिक उद्योग संचालित हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी से उद्योगों के साथ श्रमिकों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
गड्ढों में तब्दील मुख्य और आंतरिक सडक़ें
कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास मंडल (केआइएडीबी) द्वारा विकसित इस क्षेत्र में सीएनसी मशीन, वाहन एवं ऑटोमोबाइल कलपुर्जे, कपड़ा और दवा निर्माण सहित कई उद्योग हैं। मुख्य सडक़ के साथ आंतरिक सडक़ें भी गड्ढों से भरी हैं। बारिश के दौरान सडक़ें कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं, जिससे श्रमिकों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो जाती है।

एचपी गैस मार्ग की मुख्य सडक़ समेत अधिकांश आंतरिक सडक़ों पर स्ट्रीट लाइट नहीं है। पाली समाप्त होने के बाद श्रमिकों को अंधेरे में घर लौटना पड़ता है।
सडक़ किनारे फेंका जा रहा औद्योगिक कचरा
औद्योगिक क्षेत्र में कचरा निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने से उद्योगों और होटलों का कचरा, प्लास्टिक, पैकिंग सामग्री तथा रासायनिक अपशिष्ट सडक़ किनारे और खाली भूखंडों में फेंका जा रहा है। कचरा सडऩे से दुर्गंध फैल रही है और मच्छर-मक्खियों का प्रकोप बढ़ रहा है।

कई स्थानों पर नालियां क्षतिग्रस्त हैं और उनमें कचरे के साथ शराब की खाली बोतलें भी पड़ी हैं। बारिश के दौरान नालियों का गंदा पानी और कारखानों से निकलने वाला रासायनिक द्रव तालाब में पहुंचने की शिकायत है।
‘रात में असुरक्षा का डर’
श्रमिक कल्लप्पा एम. ने कहा कि स्ट्रीट लाइट नहीं होने से रात में जहरीले जीव-जंतुओं और असामाजिक तत्वों का डर बना रहता है। उन्होंने क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की।
उद्योगपतियों का कहना है कि वे प्रति एकड़ भूखंड के लिए सालाना 40 हजार रुपए शुल्क देते हैं, इसके बावजूद सडक़, प्रकाश और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए अधिकारियों से बार-बार गुहार लगानी पड़ती है।
‘जल्द दूर होंगी समस्याएं’
केआइएडीबी के क्षेत्र विकास अधिकारी आनंदकुमार झलकी ने बताया कि बेलूर औद्योगिक क्षेत्र के रखरखाव की जिम्मेदारी पहले बेलूर ग्रोथ सेंटर के पास थी, जिसे अब केआइएडीबी को सौंपा गया है। पहले चरण में व्यवस्थित नालियों का निर्माण किया जाएगा और इसके बाद सडक़ों की मरम्मत समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक ठोस कचरा प्रबंधन और कचरा संग्रहण केंद्र स्थापित करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर सरकार को मंजूरी के लिए भेजी गई है। निविदा प्रक्रिया लंबित है।
धारवाड़ विकास केंद्र उद्योग संघ के अध्यक्ष मंजुनाथ गोकावी ने कहा कि क्षेत्र में वर्ष 1988-89 में सडक़ और नालियों का निर्माण हुआ था। इसके बाद अब तक समुचित मरम्मत नहीं हुई। पेयजल की समस्या भी बनी हुई है और बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
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