डेढ़ साल से अनुदान लंबित, बढ़ती लागत में भोजन उपलब्ध कराना ठेकेदारों के लिए मुश्किल
कलबुर्गी। गरीबों को बेहद कम कीमत पर भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराने वाली इंदिरा कैंटीन भी महंगाई की मार से जूझ रही हैं। चावल, इडली रवा, दाल, खाद्य तेल, सब्जियों और व्यावसायिक गैस सिलेंडर समेत आवश्यक सामग्री के दाम बढऩे से कैंटीन संचालकों के लिए निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल हो गया है। वहीं, करीब डेढ़ वर्ष से अनुदान नहीं मिलने से ठेकेदार आर्थिक संकट में हैं।
राज्य में 581 से अधिक इंदिरा कैंटीन संचालित हैं। इनमें नाश्ता 5 रुपए और भोजन 10 रुपए में दिया जाता है। निर्धारित मेन्यू के अनुसार प्रतिदिन भोजन तैयार किया जाता है। लेकिन हाल के दिनों में खाद्य सामग्री की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी होने से संचालन लागत बढ़ गई है।
सिलेंडर 1,800 से 2,800 रुपए
कैंटीन संचालकों के अनुसार, इडली रवा पहले 40 रुपए प्रति किलोग्राम था, जो अब 50 रुपए हो गया है। व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत 1,800 से बढक़र 2,800 रुपए बताई गई है। बुलेट चावल 45 से बढक़र 75 रुपए, खाद्य तेल 130 से 145 रुपए और मूंगफली 70 से बढक़र 160 रुपए हो गई है। तुअर दाल, गुड़ और सब्जियों की कीमतों में भी वृद्धि हुई है।
किराना दुकानदारों ने उधार देना बंद किया
कैंटीन के लिए रोजाना बड़ी मात्रा में सामग्री खरीदनी पड़ती है। लेकिन सरकार और महानगर निगम से करीब डेढ़ वर्ष से बकाया अनुदान नहीं मिलने के कारण ठेकेदारों पर भुगतान का दबाव बढ़ गया है। बताया गया है कि कई किराना दुकानदारों के पुराने बिल लंबित हैं, इसलिए उन्होंने अब उधार में सामग्री देना बंद कर दिया है।
रोजाना 200 से 350 प्लेट की बिक्री
इंदिरा कैंटीन में विद्यार्थी, गरीब, नर्स और मजदूर बड़ी संख्या में भोजन करते हैं। प्रत्येक कैंटीन में रोजाना करीब 200 से 350 प्लेट नाश्ता और भोजन बिकने की जानकारी दी गई है। संचालकों का कहना है कि यदि सरकार लंबित अनुदान जारी कर दे तो कैंटीन की व्यवस्था और बेहतर ढंग से संचालित की जा सकती है।
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