क्रिम्स मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में तैयारियां पूरी
रेडियोथेरेपी के लिए परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड की अंतिम मंजूरी का इंतजार
कारवार। उत्तर कन्नड़ जिले में बढ़ते कैंसर के मामलों के बीच मरीजों को जल्द ही स्थानीय स्तर पर उपचार की सुविधा मिलने की उम्मीद है। कारवार चिकित्सा विज्ञान संस्थान (क्रिम्स) के मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में कैंसर उपचार विभाग शुरू करने की लगभग सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। रेडियोथेरेपी उपकरणों के इस्तेमाल के लिए परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) की अंतिम अनुमति मिलते ही उपचार शुरू किया जाएगा।
जिले में कैंसर अस्पताल स्थापित करने की मांग करीब डेढ़ दशक से उठ रही थी। वर्ष 2012-13 में मुंबई के टाटा स्मारक अस्पताल ने राज्य सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखा था। शिरवाड़ में अस्पताल बनाने की योजना भी जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। अंतत: वर्ष 2024 में क्रिम्स में अलग कैंसर उपचार विभाग शुरू करने को मंजूरी मिली।
विभाग के लिए रेडियोथेरेपी और एमआरआई मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं। विकिरण रोकने के लिए विशेष सुरक्षा कक्ष (बंकर) का निर्माण भी पूरा हो गया है। एक कैंसर रोग विशेषज्ञ की संविदा पर नियुक्ति की गई है। तकनीकी संचालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षित कर्मचारी भी नियुक्त किए गए हैं।
क्रिम्स की निदेशक डॉ. पूर्णिमा आर.टी. ने बताया कि उपकरणों की स्थापना पूरी हो चुकी है। रेडियोथेरेपी शुरू करने के लिए एईआरबी की अंतिम अनुमति मांगी गई है। एक-दो सप्ताह में मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
हर साल हजारों मरीजों को उपचार की जरूरत
वर्तमान में जिले के मरीजों को कैंसर उपचार के लिए मेंगलूरु, बेंगलूरु सहित अन्य शहरों के निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। महंगे उपचार के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में प्रतिवर्ष 400-450 कैंसर मामले दर्ज होते हैं, जबकि किदवई स्मारक ग्रंथि संस्थान के आंकड़ों के अनुसार वास्तविक संख्या 4,000 से अधिक बताई जाती है। स्थानीय स्तर पर उपचार शुरू होने से मरीजों को बाहर जाने की परेशानी और खर्च से राहत मिलने की उम्मीद है।
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