यादगीर में बारिश की भारी कमी से कपास को सबसे बड़ा नुकसान, राहत के लिए 224 करोड़ रुपए का अनुमान
यादगीर. जिले में मानसून की बेरुखी ने खेती की कमर तोड़ दी है। छह सूखाग्रस्त तालुकों में करीब दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें बर्बाद होने का अनुमान है। इसके साथ ही लगभग दो लाख किसान परिवार आर्थिक संकट में फंस गए हैं। जिला प्रशासन ने नुकसान का प्रारंभिक आकलन तैयार कर लिया है और केंद्रीय सूखा अध्ययन दल के अगले दौरे तक अंतिम रिपोर्ट तैयार होने की संभावना है। जिले में मानसून के दौरान 4.01 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य था। कम बारिश के बावजूद किसानों ने 3.88 लाख हेक्टेयर में बुवाई की। पर्याप्त बारिश और मिट्टी में नमी नहीं मिलने से कई क्षेत्रों में फसलें सूख गईं। कई बार दोबारा बुवाई के बाद भी तेज धूप ने फसलें झुलसा दीं।

कपास सबसे ज्यादा प्रभावित
सूखे की सबसे बड़ी मार कपास पर पड़ी है। खेतों में खड़ी फसलें किसानों की आंखों के सामने सूख गईं। करीब 1.55 लाख हेक्टेयर कपास फसल के नुकसान का अनुमान है। 39,248 हेक्टेयर अरहर, 9,632 हेक्टेयर मूंग, 635 हेक्टेयर बाजरा, 282 हेक्टेयर धान और 242 हेक्टेयर सूरजमुखी प्रभावित हुए हैं। बागवानी फसलों में 174 हेक्टेयर मिर्च, 13 हेक्टेयर टमाटर और दो हेक्टेयर प्याज को नुकसान हुआ है। यादगीर में करीब 51,681 और गुरमठकल में 43,361 किसान प्रभावित हुए हैं। शाहपुर में 38,392, सुरपुर में 27,861, वडगेरा में 26,251 और हुनसगी में 13,120 किसान सूखे की मार झेल रहे हैं।
पशुओं पर भी सूखे की मार
वडगेरा तालुक में हरे चारे और पानी की कमी से मवेशियों की परेशानी बढ़ गई है। तालाब, नाले और नदी सूखने से प्राकृतिक चारा-पानी का संकट गहरा गया है। कृषि में मशीनों के बढ़ते इस्तेमाल और व्यावसायिक फसलों के कारण पारंपरिक सूखे चारे की उपलब्धता भी घट गई है। केंद्रीय सूखा अध्ययन दल की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार शाहपुर तालुक में 36,141 हेक्टेयर कपास और 7,364 हेक्टेयर अरहर प्रभावित हुई है। कुल नुकसान 57.3 करोड़ रुपये आंका गया है। यहां सामान्य से 58.7 प्रतिशत कम बारिश हुई। भूजल स्तर गिरने से आठ स्थानों पर नलकूप भी सूख गए हैं।
अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी
जिला प्रशासन के आकलन के अनुसार आपदा राहत मानकों के करीब 224 करोड़ रुपए मुआवजे का अनुमान है। शाहपुर 57 करोड़, वडगेरा 31.35 करोड़, सुरपुर 37.37 करोड़, हुनसगी 27.92 करोड़, यादगीर 39.11 करोड़ और गुरमठकल 30.96 करोड़ रुपए अनुमानित हैं। दो लाख हेक्टेयर फसल नुकसान की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार है और केंद्रीय टीम के दौरे के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
-रमेश कोलार, अपर जिलाधिकारी

