कर्नाटक में बढ़ेगा कच्चे तेल का भंडारण, 65 लाख टन क्षमता का विस्तारकर्नाटक में बढ़ेगा कच्चे तेल का भंडारण, 65 लाख टन क्षमता का विस्तार

ओडिशा में नया रणनीतिक भंडार बनेगा, कर्नाटक की दो इकाइयों का भी होगा विस्तार

14,527 करोड़ रुपए की परियोजना

हुब्बल्ली. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया है। सरकार ने ओडिशा के चंडीखोल में 40 लाख टन क्षमता का नया रणनीतिक कच्चा तेल भंडारण केंद्र स्थापित करने तथा कर्नाटक की दो मौजूदा इकाइयों की क्षमता 25 लाख टन बढ़ाने की घोषणा की है। इस प्रकार कुल 65 लाख टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि परियोजना के दूसरे चरण के तहत ओडिशा और कर्नाटक में 14,527 करोड़ रुपए की लागत से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर रणनीतिक कच्चा तेल भंडारण सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

ईंधन आपूर्ति को मिलेगी मजबूती

सरकार का कहना है कि नई भंडारण क्षमता से अंतरराष्ट्रीय संकट या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखने, मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने तथा रणनीतिक भंडार को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।

पहले से मौजूद हैं तीन रणनीतिक भंडार

वर्तमान में देश में कर्नाटक के पादुर में 25 लाख टन, मेंगलूरु में 15 लाख टन तथा आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में 13.3 लाख टन क्षमता वाले रणनीतिक कच्चा तेल भंडारण केंद्र संचालित हैं। प्रस्तावित विस्तार के बाद भारत की रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति प्रबंधन को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

 

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