641 लोग जुड़े कारोबार से
तालाब और कृषि जलाशय बने ग्रामीणों की अतिरिक्त आय का जरिया
मूल्की (दक्षिण कन्नड़)। समुद्री मत्स्य पालन के लिए प्रसिद्ध दक्षिण कन्नड़ जिले में अब मीठे पानी की मछली पालन भी तेजी से विस्तार ले रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह किसानों और अन्य लोगों के लिए अतिरिक्त आय तथा स्वरोजगार का बेहतर विकल्प बन रही है। जिले में वर्तमान में 641 लोग मीठे पानी की मछली पालन और मत्स्य कृषि से जुड़े हैं।
बंटवाल तक बढ़ा दायरा
तालाब, खेतों में बने जलाशय और अन्य जलस्रोतों का उपयोग कर मछली पालन किया जा रहा है। बंटवाल में 64, बेल्तंगड़ी में 152, कडबा में 65, मेंगलूरु में 25, मूडबिद्री में 70, मूल्की में 39, पुत्तूर में 75, सुल्या में 126 और उल्लाल में 22 लोग इस क्षेत्र से जुड़े हैं।
स्थानीय बाजार में अच्छी मांग
रोहू, कटला और मृगल जैसी मीठे पानी की मछलियों की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग है। समुद्री मछली की उपलब्धता मौसम और समुद्री परिस्थितियों पर निर्भर रहती है, जबकि नियंत्रित वातावरण में मीठे पानी की मछली का उत्पादन वर्षभर किया जा सकता है।
होटल, मछली बाजार और घरेलू उपभोग में मांग रहने से उत्पादकों को स्थानीय स्तर पर ही बाजार उपलब्ध हो रहा है।
कम जमीन में भी संभव
कृषि तालाब और उपलब्ध जलस्रोतों का उपयोग कर किसान खेती के साथ मछली पालन कर अतिरिक्त आय कमा सकते हैं। धान, सब्जियों जैसी फसलों के साथ मत्स्य पालन करने से एक ही जमीन से आय के कई स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।
रोजगार के नए अवसर
मछली के बीज उत्पादन, चारा आपूर्ति, तालाब प्रबंधन, मछली पकडऩे, परिवहन और बिक्री से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
आकर्षित हो रहे हैं किसान
सरकार के प्रोत्साहन से किसान इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं। वैज्ञानिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, प्रशिक्षण, बाजार संपर्क और तकनीकी मार्गदर्शन को मजबूत करने से मीठे पानी की मछली पालन को और विस्तार दिया जा सकता है।
–दिलीप कुमार, प्रभारी उपनिदेशक, मत्स्य पालन विभाग
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

