वन विभाग की कार्रवाई से बेल्तंगड़ी के ग्रामीणों में दहशत
कडिरुद्यावर के बोल्लुरुबैल निवासियों को जमीन खाली करने का फरमान
पट्टा होने के बावजूद बेदखली का खतरा
बेल्तंगड़ी (दक्षिण कन्नड़)। दशकों से खेती और मकान बनाकर जीवन यापन कर रहे दक्षिण कन्नड़ जिले के बेल्तंगड़ी तालुक स्थित कडिरुद्यावर गांव के बोल्लुरुबैल क्षेत्र के सात परिवारों को वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किए जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व डर का माहौल है।
दशकों पुराना वास, फिर भी बेदखली का डर
बोल्लुरुबैल में 35 से अधिक परिवार वर्षों से निवास कर रहे हैं और कृषि ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। यहां के कुछ निवासियों को 1979 में ही जमीन के हकपत्र (स्वामित्व पत्र, पट्टा) मिल चुके थे, जबकि कई परिवारों ने 1989 में आवेदन किया था, जो वन विभाग की आपत्तियों के कारण लंबित हैं। इससे पहले 2002-03 में भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अब अगस्त में दूसरा नोटिस जारी कर निवासियों को सुनवाई के लिए बुलाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे वन विभाग के कार्यालय पहुंचे, तो अधिकारियों ने बिना सुनवाई किए उन्हें वापस भेज दिया।
अतिक्रमण हटाओ अभियानों से बढ़ा खौफ
तालुक में पूर्व में हुई दो घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। वन विभाग ने शिबाजे गांव में दो एकड़ फसल नष्ट कर एक परिवार को बेदखल कर दिया था। इसके अलावा मलवंतिगे गांव के दिडुपे अरसिनमक्की निवासी जोसेफ की चार एकड़ जमीन वन्यजीव प्रभाग द्वारा बिना किसी मुआवजे के जब्त कर ली गई थी। राजस्व और वन विभाग के बीच भूमि सीमा के भ्रम के कारण हजारों किसान प्रभावित हो रहे हैं।
वैध दस्तावेजों की जांच जारी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उनके पूर्वजों ने कड़ी मेहनत से इस भूमि को कृषि योग्य बनाया है और वे इसे किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। दूसरी ओर, बेल्तंगड़ी के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (आरएफओ) महेश देवाडिगा ने स्पष्ट किया है कि जिन निवासियों के पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं, उन्हें कोई समस्या नहीं होगी। उन्होंने नोटिस पाने वाले परिवारों से तुरंत अपने दस्तावेज विभाग के समक्ष प्रस्तुत करने की अपील की है।
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