दावणगेरे, शिवमोग्गा, चिक्कमगलूरु और चित्रदुर्ग के लिए वरदान बना भद्रा जलाशय
30 से अधिक शहरों को दे रहा पेयजल
शिवमोग्गा। पश्चिमी घाट की पर्वत श्रृंखलाओं से निकलने वाली भद्रा नदी पर बना भद्रा जलाशय केवल पानी का विशाल संचय केंद्र नहीं, बल्कि मध्य कर्नाटक की कृषि, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और भविष्य की जल सुरक्षा का मजबूत आधार है। जब यह जलाशय लबालब भरता है, तो शिवमोग्गा, चिक्कमगलूरु, दावणगेरे और चित्रदुर्ग जिलों में उत्सव सा माहौल बन जाता है। वहीं हावेरी, गदग, विजयनगर और बल्लारी जिलों की प्यास बुझने से राहत की सांस ली जाती है। इसके विपरीत, सूखे के समय जलाशय न भरने पर पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां थम सी जाती हैं।
इतिहास और भौगोलिकता
चिक्कमगलूरु जिले के कलसा तालुक में कुद्रेमुख की वराह पर्वत श्रेणियों के गंगा मूल से निकलने वाली भद्रा नदी कलसा, कोप्पा, नरसिंहराजपुर, तरीकेरे और भद्रावती से बहती हुई कुडली के पास तुंगा नदी में मिलकर तुंगभद्रा बनती है। तरीकेरे के लक्कवल्ली में दो पहाडिय़ों के बीच 1,708 मीटर लंबा, 59.14 मीटर ऊंचा और 71.50 टीएमसी की भंडारण क्षमता वाला यह बांध बनाया गया है। स्वतंत्रता के बाद 1947 में शुरू हुई इस परियोजना का बांध कार्य 1959 में और नहरों का निर्माण 1966 में पूरा हुआ।
सूखी भूमि हुई हरी-भरी
भद्रा बांध की बाईं तट नहर शिवमोग्गा और भद्रावती में 77.24 किमी बहकर 8,300 हेक्टेयर भूमि को सिंचित करती है। वहीं 366.90 किमी लंबी दाईं तट नहर तरीकेरे, भद्रावती, चन्नगिरी, होन्नाली, दावणगेरे, हरिहर और हरपनहल्ली तालुकों में 1 लाख हेक्टेयर भूमि को जल प्रदान करती है। पहले किसान यहां धान और गन्ने की खेती करते थे, जो अब बड़े पैमाने पर सुपारी के बागानों में बदल चुकी है। इससे क्षेत्र को सालाना अरबों रुपए की आय होती है।
30 से अधिक शहरों की बुझ रही प्यास
पेयजल आपूर्ति के लिए जलाशय में 8.50 टीएमसी पानी आरक्षित रखा गया है। भद्रावती, तरीकेरे, बीरूर, कडूर, चन्नगिरी, दावणगेरे, हरिहर, चित्रदुर्ग, राणेबेन्नूर, हावेरी, गदग-बेटगेरी और मुंडरगी सहित 30 से अधिक शहरों, कस्बों और हजारों गांवों को भद्रा नदी से ही पीने का पानी मिलता है। इसके अलावा, बांध की नहरों से 37.2 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है तथा इसके सामने राज्य का सबसे बड़ा मत्स्य पालन केंद्र भी संचालित है।
गाद की समस्या और अपर भद्रा परियोजना
तुंगभद्रा की भांति भद्रा जलाशय में भी गाद (सिल्ट) जमने की समस्या देखी जा रही है। गाद के कारण जल संग्रहण क्षमता में 4.87 टीएमसी की कमी आई है, हालांकि 13.83 टीएमसी डेड स्टोरेज होने के कारण फिलहाल पानी की कमी का संकट नहीं है। दूसरी ओर, चित्रदुर्ग, दावणगेरे और तुमकूरु जैसे सूखाग्रस्त इलाकों के 2.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई देने और 367 झीलों को भरने के लिए अपर भद्रा योजना पर तेजी से काम चल रहा है, जिसके तहत तुंगा नदी से भद्रा में पानी मोडक़र कुल 29.90 टीएमसी पानी का उपयोग किया जाएगा।
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