वेतन और डीजल भुगतान पर भी संकट
सरकारी पुनर्भुगतान में देरी से केएसआरटीसी और बीएमटीसी की बिगड़ी आर्थिक स्थिति
20,955 करोड़ रुपए तक पहुंचा कुल मुफ्त टिकट मूल्य
हुब्बल्ली। राज्य सरकार की महात्वाकांक्षी शक्ति योजना के तहत महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दे रहे कर्नाटक के चारों राज्य सडक़ परिवहन निगम भारी वित्तीय संकट में फंस गए हैं। सरकार द्वारा महिलाओं के यात्रा टिकटों की राशि का समय पर पुनर्भुगतान न किए जाने के कारण चारों निगमों का कुल बकाया 5,651.24 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इस बकाए की वजह से निगमों को कर्मचारियों के वेतन, डीजल खरीद और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति जैसे दैनिक खर्चों को पूरा करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
797 करोड़ बार हुई मुफ्त यात्रा
जून 2023 में शुरू हुई शक्ति योजना के तहत जुलाई 2026 के अंत तक महिलाओं ने चारों निगमों की बसों में कुल 797.16 करोड़ बार मुफ्त यात्राएं की हैं। इन जारी किए गए शून्य मूल्य के टिकटों का कुल मूल्य 20,955.99 करोड़ रुपए बैठता है। हालांकि, सरकार ने अब तक निगमों को 15,304.76 करोड़ रुपए ही जारी किए हैं, जिससे 5,651.24 करोड़ रुपए का अंतर बकाया बना हुआ है। निगम अधिकारियों द्वारा बार-बार पत्र लिखे जाने के बावजूद धन जारी होने की गति बेहद धीमी है।
सरकारी सहायता के बाद भी घाटा कायम
केएसआरटीसी, बीएमटीसी, एनडब्ल्यूकेआरटीसी और केकेआरटीसी को पिछले तीन वर्षों में शक्ति योजना, छात्र पास सब्सिडी, बस खरीद और ईंधन व्यय के लिए सरकार से 18,459.37 करोड़ रुपए की कुल सहायता मिली है। इसके बावजूद निगमों का घाटा कम नहीं हो रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, डीजल बसों के अलावा सडक़ों पर उतारी गईं नई इलेक्ट्रिक बसों से भी अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो पा रहा है।
रोजमर्रा के परिचालन पर असर
निगमों के पास सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाए का भुगतान करने और बसों के रखरखाव के लिए धन की भारी किल्लत हो गई है। मुफ्त यात्रा के कारण सरकारी परिवहन निगमों पर तो आर्थिक दबाव बढ़ा ही है, साथ ही निजी बस संचालकों को भी सवारियों की कमी के कारण भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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