मेंगलूरु के रेल विकास को ‘डेढ़ किमी’ की बाधामेंगलूरु के रेल विकास को ‘डेढ़ किमी’ की बाधा

सेंट्रल-जंक्शन के बीच सिंगल लाइन

स्टेशन पर छत, शौचालय और एस्केलेटर तक अधूरे

मेंगलूरु। दक्षिण कर्नाटक के प्रमुख रेल केंद्र मेंगलूरु के सेंट्रल और जंक्शन रेलवे स्टेशन आज भी बुनियादी सुविधाओं और बेहतर रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे हैं। दोनों स्टेशनों के बीच महज कुछ किलोमीटर की दूरी है, लेकिन करीब 1.5 किमी रेलखंड अब भी सिंगल लाइन होने से ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित होती है। क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम रेलवे जोन में शामिल होने के बाद यात्रियों को अब सुधार की उम्मीद है।

18.93 करोड़ की मंजूरी, काम अब भी अधूरा

मेंगलूरु जंक्शन से नेत्रावती केबिन तक रेलमार्ग का दोहरीकरण हो चुका है। लेकिन केबिन से सेंट्रल स्टेशन तक डेढ़ किमी हिस्सा सिंगल लाइन है। सेंट्रल टर्मिनल स्टेशन होने के कारण इस हिस्से से ट्रेनों को प्रवेश और निकास करना पड़ता है।

वर्ष 2016 में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार इस खंड के दोहरीकरण के लिए 18.93 करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे। इसका उद्देश्य ट्रेनों का आवागमन सुगम बनाना था। बावजूद इसके काम लंबित है।

बारिश में भीगते यात्री, एस्केलेटर भी बंद

एक सदी से अधिक पुराने सेंट्रल स्टेशन पर चार और पांच नंबर प्लेटफॉर्म विकसित किए जाने के बावजूद वहां पूरी छत नहीं है। बारिश में यात्रियों को परेशानी होती है। इन प्लेटफॉर्मों पर पर्याप्त शौचालय सुविधा भी नहीं है।

प्लेटफॉर्म 2 से 5 तक जाने के लिए एस्केलेटर की सुविधा नहीं है। स्टेशन से बाहर निकलने वाला एस्केलेटर भी लंबे समय से खराब बताया जा रहा है। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए फिलहाल लिफ्ट ही प्रमुख सहारा है।

जंक्शन भी सुविधाओं से वंचित

उत्तर और दक्षिण दिशा की कई ट्रेनें जंक्शन से होकर गुजरती हैं, लेकिन यहां भी अपेक्षित विकास नहीं हुआ है। प्लेटफॉर्म 4 और 5 तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

विश्वस्तरीय स्टेशन की योजना भी अधूरी

करीब 2009 में सेंट्रल स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने की योजना बनी थी। बहुमंजिला वाणिज्यिक परिसर, स्वचालित पार्किंग और आधुनिक यात्री प्लाजा प्रस्तावित थे, लेकिन जमीन और रेलवे जोन से जुड़े विवादों के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी। बाद में करीब 95 करोड़ रुपए से सीमित विकास कार्य हुए।

नई ट्रेनों की भी कमी

पश्चिम रेलवे विकास यात्री संघ के अनिल हेगड़े के अनुसार, करीब 10 वर्षों से पालक्काड मंडल की ओर से मेंगलूरु से कर्नाटक के अन्य हिस्सों और उत्तर भारत के लिए नई ट्रेनों की सिफारिश नहीं की गई है। वहीं तोकूर-मेंगलुरु खंड में सिग्नलिंग सुधार और ट्रैक को 110 किमी प्रति घंटे की गति के अनुरूप उन्नत करने की मांग भी लंबित है।

रेल यात्रियों का कहना है कि जोन बदलने के बाद अब मेंगलूरु के रेल ढांचे को वर्षों पुरानी उपेक्षा से बाहर निकालना जरूरी है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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