दावणगेरे उपचुनाव
कांग्रेस की अजेय परंपरा दांव पर
भाजपा पहली जीत की उम्मीद में
अंदरूनी कलह बना निर्णायक मुद्दा
दावणगेरे. दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव का मतदान संपन्न होते ही अब राजनीतिक गलियारों में जीत-हार के समीकरण तेज हो गए हैं। इस सीट की खासियत यह है कि यहां अब तक कांग्रेस कभी नहीं हारी, जबकि भाजपा को अब तक जीत नसीब नहीं हुई। ऐसे में इस बार का परिणाम किसी भी पक्ष के लिए ऐतिहासिक साबित होने वाला है।
इतिहास रचेगा परिणाम
यदि कांग्रेस जीतती है तो वह अपनी लगातार जीत की परंपरा बरकरार रखेगी। वहीं भाजपा की जीत इस सीट पर उसका खाता खोलने के साथ बड़ा राजनीतिक संदेश देगी। इस कारण यह उपचुनाव राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
कांग्रेस में अंदरूनी कलह बड़ा मुद्दा
मतदान के बाद कांग्रेस में अल्पसंख्यक नेताओं के बीच विवाद खुलकर सामने आया है। मुख्य सचेतक सलीम अहमद और विधायक रिजवान अर्शद ने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर ही कुछ नेताओं ने उम्मीदवार को हराने की साजिश रची।
इसी विवाद के बीच एमएलसी अब्दुल जब्बार ने केपीसीसी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे मामला और गरमा गया है।
भाजपा में उत्साह, जीत का दावा
दूसरी ओर भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है। पार्टी उम्मीदवार श्रीनिवास टी. दासकरीयप्पा ने दावा किया है कि इस बार जीत तय है और कार्यकर्ताओं को जश्न के लिए तैयार रहने को कहा है।
5 बड़े फैक्टर जो तय करेंगे परिणाम
1. कांग्रेस की परंपरा बनाम भाजपा की चुनौती
कांग्रेस की लगातार जीत और भाजपा की पहली जीत की कोशिश।
2. अल्पसंख्यक वोट बैंक की भूमिका
मुस्लिम मतदाताओं की नाराजगी या समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है।
3. अंदरूनी गुटबाजी
कांग्रेस में कथित बगावत और असंतोष का सीधा असर परिणाम पर पड़ सकता है।
4. स्थानीय नेतृत्व और प्रभाव
शामनूर परिवार का प्रभाव और उसके खिलाफ संभावित माहौल।
5. ऐतिहासिक पैटर्न की वापसी
राजनीतिक विश्लेषक 1994 जैसी कांटे की टक्कर की संभावना जता रहे हैं।
पुराने चुनावों की चर्चा तेज
1994 के चुनाव में शामनूर शिवशंकरप्पा ने बेहद कम अंतर से जीत दर्ज की थी। वहीं 2013 में कांग्रेस ने बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। इस बार कौन सा इतिहास दोहराया जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
उम्मीदवार ‘रिलैक्स’ मूड में
मतदान के बाद दोनों प्रमुख उम्मीदवार फिलहाल सहज नजर आ रहे हैं। कांग्रेस उम्मीदवार समर्थकों से मिलकर आभार जता रहे हैं, जबकि भाजपा उम्मीदवार सामाजिक कार्यक्रमों में व्यस्त हैं।
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