"सूत नहीं तो कपड़ा कैसे बनेगा?"इचलकरंजी पावरलूम विवर्स एसोसिएशन में आयोजित बैठक में वस्त्रोद्योग आयुक्त संजय दैने को सम्मानित करते उद्यमी।

पावरलूम उद्योग पर गहराया संकट

मध्य-पूर्व युद्ध के असर से सूत महंगा, उत्पादन ठप

कुशल कामगारों की कमी भी बनी बड़ी चुनौती

कोल्हापुर. मध्य-पूर्व देशों में जारी युद्ध का असर अब स्थानीय उद्योगों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कोल्हापुर और इचलकरंजी के पावरलूम उद्योग में सूत की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और किल्लत के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उद्योग जगत में यह सवाल उठ रहा है कि “सूत नहीं तो कपड़ा कैसे तैयार होगा?”

सूत महंगा, उत्पादन पर ब्रेक

पेटीकोट, बेडशीट, गाउन और ब्लाउज जैसे उत्पादों के लिए उपयोग होने वाले 32, 40 और 60 काउंट सूत के दाम तेजी से बढ़े हैं। वहीं 30 पीसी और 16 नंबर कोर्स काउंट सूत की कीमतों में भी प्रति किलो 50 से 60 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। कपास के बढ़ते दाम और बाजार में कपड़े की कमजोर मांग ने स्थिति और गंभीर बना दी है। इसका सीधा असर मजदूरी आधारित काम करने वाले पावरलूम संचालकों पर पड़ा है।

सायझिंग उद्योग भी प्रभावित

कच्चे माल और केमिकल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते सायझिंग उद्योग भी संकट में है। कई इकाइयां सप्ताह में एक से दो दिन बंद रखने को मजबूर हैं, जिससे उत्पादन श्रृंखला पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

प्रशिक्षण केंद्र की जरूरत पर जोर

इचलकरंजी पावरलूम विवर्स एसोसिएशन में आयोजित बैठक में वस्त्रोद्योग आयुक्त संजय दैने ने कुशल जनशक्ति तैयार करने के लिए प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने का प्रस्ताव भेजने की अपील की। उन्होंने बताया कि अमरावती टेक्सटाइल पार्क में पहले से ऐसा केंद्र संचालित है और उसी तर्ज पर इचलकरंजी व सोलापुर में भी पहल की जानी चाहिए।

इस बैठक में सहआयुक्त गणेश वंडकर, प्रादेशिक उपायुक्त उज्ज्वला पलसकर सहित कई उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित थे। उद्योग संगठनों ने प्रशिक्षण और तकनीकी विकास पर जोर दिया।

कामगारों की कमी बनी बड़ी चुनौती

एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा कि पावरलूम उद्योग आज भी परप्रांतीय कामगारों पर निर्भर है। पहले उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान से कामगार आते थे, लेकिन अब वहां रोजगार मिलने से उनका आना कम हो गया है। वर्तमान में असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से कामगार आ रहे हैं, फिर भी कमी बनी हुई है।

कल्याणकारी मंडल की मांग तेज

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रशिक्षण केंद्र का निर्णय स्वागत योग्य है, लेकिन कामगारों को आकर्षित करने के लिए निर्माण मजदूरों की तर्ज पर कल्याणकारी मंडल की स्थापना जरूरी है। इससे न केवल कामगारों की कमी दूर होगी, बल्कि उद्योग को भी स्थिरता मिलेगी।

पावरलूम उद्योग इस समय कच्चे माल की महंगाई और श्रमिक संकट जैसी दोहरी मार झेल रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और गहरा सकता है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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