कृषि और जल संरक्षण मॉडल पर टोक्यो यूनिवर्सिटी की विशेष रुचि
पुत्तूर (दक्षिण कन्नड़). जापान की टोक्यो कृषि विश्वविद्यालय (टोक्यो नोदाई) के शैक्षणिक प्रतिनिधियों के एक दल ने दक्षिण कन्नड़ और कासरगोड क्षेत्र में पारंपरिक सुरंग जल प्रणाली तथा उसके कृषि पर प्रभाव का अध्ययन करने के लिए रविवार को दौरा किया।
दल ने दक्षिण कन्नड़ जिले के माणिमूले क्षेत्र में गोविंद भट्ट तथा अमै महालिंग नायक द्वारा निर्मित सुरंगों सहित कासरगोड जिले की विशिष्ट जल संरचनाओं का निरीक्षण किया।
जल सुरक्षा में सुरंगों की भूमिका पर अध्ययन
शोध दल का उद्देश्य लेटराइट (लाल पत्थर) पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय कृषि को सहारा देने और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में इन पारंपरिक जल स्रोतों की भूमिका का विश्लेषण करना है।
दो दिवसीय दौरे के दौरान टीम कृषि फार्मों का दौरा करेगी, स्थानीय लोगों से संवाद करेगी और सुरंग निर्माण की पारंपरिक प्रक्रिया का अध्ययन करेगी।
विशेषज्ञों की टीम कर रही है शोध
टोक्यो नोदाई के इंटरनेशनल एग्रीकल्चर एंड फूड स्टडी फैकल्टी के कमीशंड प्रोफेसर ओमे छिपाएं टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। दल में शोधकर्ता शिम्योजु कोशिरो, काटो नाओकी और युगुची हिकारू शामिल हैं।
क्षेत्रीय अध्ययन के लिए मार्गदर्शन सरकारी कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, निलांबुर के भूगोल विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वी. गोविंदन कुट्टी द्वारा किया जा रहा है।
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