मौसम की विदाई से पहले ही जलाशय सूखे
नीरसागर भी 1 से घटकर 0.45 टीएमसी
डीसी ने पानी का मितव्ययता से इस्तेमाल करने की दी सलाह
हुब्बल्ली। मानसून अभी पूरी तरह विदा भी नहीं हुआ है और हुब्बल्ली-धारवाड़ की प्यास बुझाने वाले प्रमुख जलस्रोतों में पानी तेजी से घटने लगा है। सावदत्ती स्थित मालप्रभा (रेणुकासागर) जलाशय में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 16.08 टीएमसी पानी कम है। वहीं, कलघटगी तालुक के दुम्मवाड़ के पास स्थित नीरसागर जलाशय का जलभंडार भी एक टीएमसी से घटकर महज 0.45 टीएमसी रह गया है। घटते जलभंडार ने आने वाली गर्मियों में पेयजल उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
18 सितंबर 2025 को मालप्रभा जलाशय में 37.731 टीएमसी पानी था, जो 18 सितंबर 2026 को घटकर 21.649 टीएमसी रह गया। यानी एक साल में 16.082 टीएमसी की कमी दर्ज हुई। नीरसागर में भी पिछले वर्ष के एक टीएमसी के मुकाबले इस वर्ष केवल 0.45 टीएमसी पानी बचा है।
अभी 2 से 6 दिन में मिल रहा पानी
नीरसागर का पानी मुख्य रूप से पुराने हुब्बल्ली क्षेत्र में पहुंचाया जाता है। फिलहाल वर्षाकाल में भी कुछ क्षेत्रों में करीब आठ दिन के अंतराल पर जलापूर्ति हो रही है। वहीं, हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर के 82 वार्डों में से केवल 13 वार्डों में 24गुणा7 जलापूर्ति हो रही है, जबकि शेष वार्डों में दो से छह दिन के अंतराल पर पानी दिया जा रहा है।
जिलाधिकारी स्नेहल आर. के अनुसार, 18 सितंबर तक धारवाड़ जिले में सामान्य 450.3 मिमी के मुकाबले केवल 247.9 मिमी बारिश हुई है—करीब 45 प्रतिशत कमी। उन्होंने लोगों से पानी का मितव्ययता से उपयोग और संरक्षण करने की अपील की है।
17 गांवों में अभी से पानी की समस्या
जिलाधिकारी के अनुसार जिले के तीन तालुकों के ग्रामीण क्षेत्रों के 17 गांवों में पेयजल समस्या सामने आई है। इन गांवों में 19 निजी बोरवेल के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। नवलगुंद, अण्णिगेरी, हुब्बल्ली और कुंदगोल तालुकों में मालप्रभा जलाशय से नहरों के जरिए 55 पेयजल तालाब भरे गए हैं, जिनका पानी नवंबर के अंत तक उपयोग में लाया जा सकता है।
इस बीच सितंबर में तापमान भी सामान्य से अधिक बना हुआ है। 1 से 17 सितंबर के बीच औसत तापमान 31.93 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बारिश की कमी और बढ़ती गर्मी ने जलसंकट की चिंता को और गहरा कर दिया है।
प्रशासन ने लोगों से शॉवर के बजाय बाल्टी का इस्तेमाल करने, नलों और पाइपों की लीकेज तत्काल ठीक कराने तथा घरों में इस्तेमाल हुए पानी को यथासंभव दोबारा उपयोग में लाने की अपील की है। सवाल अब यही है—अगर मानसून के दौरान ही जलाशयों की यह स्थिति है, तो गर्मी में हुब्बल्ली-धारवाड़ की प्यास कैसे बुझेगी?
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