1998 से 2014 के बीच पंचायत रिकॉर्ड में 1,510 दफन, पुलिस रजिस्टर में 1,480 का उल्लेख
महिला आयोग ने एसआइटी का दायरा बढ़ाने की मांग की
बेल्तंगड़ी (दक्षिण कन्नड़)। धर्मस्थल मामले की जांच में अब एक नया तथ्य सामने आने की रिपोर्ट है। विशेष जांच दल (एसआइटी) की प्राथमिक रिपोर्ट में 1998 से 2014 के बीच दर्ज अस्वाभाविक मौतों (यूडीआर) के रिकॉर्ड में धर्मस्थल ग्राम पंचायत और पुलिस थाने के दस्तावेजों के बीच अंतर पाए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत के रिकॉर्ड में इस अवधि में 1,510 शवों के दफन का उल्लेख है, जबकि धर्मस्थल पुलिस थाने के रजिस्टर में 1,480 अस्वाभाविक मौतें दर्ज हैं। यानी 30 मामलों का अंतर सामने आया है।
इस अंतर से संबंधित रिकॉर्ड, शवों की पहचान और मृत्यु के दस्तावेजों को लेकर जांच एजेंसियों के सामने नए सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, इन 30 मामलों को लेकर अभी यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि वे सभी संदिग्ध मौतें थीं। रिकॉर्ड में अंतर की प्रकृति और उसके कारणों की जांच जरूरी है।
महिला आयोग ने दायरा बढ़ाने को कहा
रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक राज्य महिला आयोग ने एसआइटी की रिपोर्ट के आधार पर राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस पहलू की भी विस्तृत जांच कराने की मांग की है। आयोग ने एसआइटी के जांच दायरे में आवश्यक विस्तार करने तथा पुलिस रजिस्टर, ग्राम पंचायत के मृत्यु एवं दफन रिकॉर्ड और संबंधित चिकित्सकीय दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासनिक निर्देश जारी करने की मांग की है।
धर्मस्थल से जुड़े मामलों में जांच का दायरा पहले ही बढ़ चुका है। 21 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 2012 की सौजन्या दुष्कर्म-हत्या मामले में नए सिरे से जांच का आदेश दिया था। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने 24 सितंबर को आइजीपी एन. शशिकुमार के नेतृत्व में पांच सदस्यीय नई एसआइटी गठित की है। ऐसे में 30 शवों के रिकॉर्ड में कथित अंतर की पुष्टि, दस्तावेजों का मिलान और प्रत्येक मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा।
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