मध्य पूर्व युद्ध का असर, अंडे की कीमतों में भारी गिरावट
6.5 रुपए से घटकर 3 रुपए प्रति अंडा
गुलेदगुड्डा (बागलकोट). मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब स्थानीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। गुलेदगुड्डा कस्बे में पोल्ट्री उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है, जहां अंडों की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
कस्बे में 20 से अधिक पोल्ट्री फार्म संचालित हैं, जिनमें करीब 8 लाख मुर्गियां हैं। यहां प्रतिदिन लगभग 6 लाख अंडों का उत्पादन होता है। इन अंडों की आपूर्ति बेंगलूरु, हुब्बल्ली, हैदराबाद, होसपेट और रायचूर समेत कई शहरों में की जाती रही है, साथ ही अरब देशों को भी बड़े पैमाने पर निर्यात होता था।
निर्यात ठप, बाजार में बढ़ी आपूर्ति
व्यापारियों के अनुसार, अमरीका-ईरान-इजराइल से जुड़े तनाव और युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित हुआ है, जिससे अंडों का निर्यात लगभग ठप हो गया है। परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में अंडे स्थानीय स्तर पर ही बच रहे हैं।
गर्मी के मौसम में अंडों के जल्दी खराब होने की आशंका के चलते व्यापारी मजबूरी में कम कीमत पर बिक्री कर रहे हैं।
कीमतों में आधी से ज्यादा गिरावट
युद्ध से पहले जहां थोक बाजार में एक अंडे की कीमत 6.5 रुपए थी, वहीं अब यह घटकर 3 रुपए रह गई है। खुदरा बाजार में भी व्यापारी 5 रुपए प्रति अंडा बेचने को मजबूर हैं।
पोल्ट्री फार्म मालिक पी.एन. पवार का कहना है कि निर्यात बंद होने और बाहरी बाजारों में मांग घटने से आय पर सीधा असर पड़ा है, जिससे कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है।
स्थानीय मांग भी घटी
गर्मी के कारण स्थानीय स्तर पर भी अंडों की खपत कम हो गई है। इसके अलावा, कस्बे में चलने वाली ‘एग राइस’ की दुकानें गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से बंद पड़ी हैं, जिससे खपत और प्रभावित हुई है।
अंडा विक्रेता गणपति धोंगड़े बताते हैं कि अब वे सीधे ग्राहकों को 5 रुपए में अंडे बेच रहे हैं, लेकिन बिक्री पहले की तुलना में काफी कम है। दूरदराज के बाजारों में आपूर्ति भी घटा दी गई है।
पोल्ट्री उद्योग पर बढ़ता संकट
उत्पादन लगातार जारी रहने और मांग घटने से पोल्ट्री व्यवसायियों के सामने भंडारण, नुकसान और आय संकट की तिहरी चुनौती खड़ी हो गई है।
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