दक्षिण कन्नड़ में पहला सरकारी माइक्रोबायोलॉजी लैब पुत्तूर मेंपुत्तूर पहुंचकर प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण करतीं ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की आयुक्त बी. फौजिया तरन्नुम।

पेयजल में बैक्टीरिया की जांच के लिए करीब 25 लाख रुपए का प्रस्ताव

स्वीकृति के बाद शुरू होगा काम

पुत्तूर (दक्षिण कन्नड़)। दक्षिण कन्नड़ जिले में पेयजल की गुणवत्ता जांच को और प्रभावी बनाने के लिए जिले की पहली सरकारी माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला पुत्तूर में स्थापित करने की तैयारी है। ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने इसके लिए राज्य सरकार को अनुमानित लागत का प्रस्ताव भेजा है। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद प्रयोगशाला स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति और उसकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की है। विभाग के अधीन जिले में फिलहाल मेंगलूरु, पुत्तूर और बेल्तंगडी में तीन रासायनिक प्रयोगशालाएं हैं। इनमें पानी में रासायनिक तत्वों की जांच होती है, जबकि बैक्टीरिया की पुष्टि के लिए नमूने निजी प्रयोगशालाओं में भेजने पड़ते हैं।

पुत्तूर में 1,000 वर्गफुट जगह तय

मेंगलूरु में उपयुक्त भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण पुत्तूर स्थित ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यालय परिसर में करीब 1,000 वर्गफुट क्षेत्र में माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। विभाग की आयुक्त बी. फौजिया तरन्नुम ने पिछले महीने पुत्तूर पहुंचकर प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण भी किया था।

पहले चरण में 25 लाख रुपए का प्रस्ताव

पानी के नमूनों की समयबद्ध और विश्वसनीय सूक्ष्मजीव जांच के लिए पूरी तरह बंद और सुविधायुक्त कक्ष की जरूरत होगी। सिविल कार्यों के लिए करीब 25 लाख रुपए का प्रस्ताव विभाग के मुख्यालय को भेजा गया है। कुछ संशोधन सुझाए जाने के बाद संशोधित प्रस्ताव जल्द भेजा जाएगा।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, सिविल कार्य पूरा होने के बाद अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना के लिए अतिरिक्त करीब 25 लाख रुपए की आवश्यकता हो सकती है। प्रयोगशाला में मुख्य रूप से बोरवेल के पानी की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। निजी व्यक्ति भी निर्धारित शुल्क देकर पानी के नमूनों की जांच करा सकेंगे।

फिलहाल एच2एस किट से जांच

पानी में बैक्टीरिया की मौजूदगी की प्राथमिक जांच फिलहाल एच2एस वायल किट से की जाती है। संदिग्ध नमूनों को विस्तृत जांच के लिए मेंगलूरु की निजी प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक जिले से लिए गए पानी के नमूनों में कोई गंभीर बैक्टीरियल संदूषण नहीं पाया गया है।

मंजूरी मिलते ही काम शुरू

जिले में विभाग के अधीन रासायनिक प्रयोगशालाएं हैं, लेकिन माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला नहीं है। पहली सरकारी प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए मुख्यालय को अनुमानित लागत का प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही काम शुरू किया जाएगा।
जयप्रकाश सी., कार्यकारी अभियंता, ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, मेंगलूरु

 

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By Bharat Ki Awaz

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