शाल्मला नदी का जलस्तर शून्य, बिना जलाभिषेक के हजारों शिवलिंग
स्थानीय लोगों ने जताई चिंता
सिरसी. उत्तर कर्नाटक का प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल सहस्रलिंग इन दिनों भीषण गर्मी और जलसंकट के कारण वीरान पड़ा है। कभी सैकड़ों-हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों से गुलजार रहने वाला यह स्थान अब सूखी नदी और तपते पत्थरों तक सीमित हो गया है।
शाल्मला नदी सूखी, पत्थरों में तब्दील हुआ प्रवाह
शाल्मला नदी का जल प्रवाह पूरी तरह थम चुका है, जिससे नदी का तल सूखे पत्थरों के ढेर में बदल गया है। आमतौर पर जलधारा में डूबे रहने वाले हजारों शिवलिंग अब तेज धूप में तप रहे हैं। श्रद्धालु, जो पहले यहां स्नान कर जलाभिषेक करते थे, अब निराश लौट रहे हैं।
पर्यटन पर पड़ा गहरा असर
स्थानीय लोगों के अनुसार, हर साल गर्मियों में भी यहां थोड़ा बहुत पानी रहता था, लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है। ठंडी हवा की जगह अब गर्म लू चल रही है।
पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट से स्थानीय पर्यटन और व्यवसाय पर भी बड़ा असर पड़ा है।
जल प्रबंधन में लापरवाही का आरोप
नदी तट के निवासी रामचंद्र हेगड़े ने बताया कि नदी में बचा-खुचा पानी भी गड्ढों में सड़ चुका है और उपयोग के योग्य नहीं है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ऊपर की ओर देवर होले क्षेत्र में बने बांध के गेट समय पर नहीं लगाए गए, जिससे बारिश का पानी बहकर निकल गया। पहले हर साल बारिश के बाद गेट लगाकर पानी रोका जाता था, जिससे गर्मियों में भी नदी में जल बना रहता था।
धार्मिक आयोजनों पर भी असर
विशेष अवसरों जैसे महाशिवरात्रि पर बांध के गेट खोलकर सहस्रलिंग तक पानी पहुंचाया जाता था, लेकिन इस बार यह संभव नहीं हो पाया। इससे धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।
बारिश पर टिकी उम्मीदें
स्थानीय निवासी विकास हेगड़े का कहना है कि इस बार तापमान अधिक होने से तय समय से पहले ही जलसंकट गहरा गया। अब क्षेत्र की पुरानी सुंदरता केवल अच्छी बारिश के बाद ही लौट सकती है।
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