दांडेली में काला और धब्बेदार तेंदुआ दिखने से दहशतदांडेेली के आबादी वाले क्षेत्र के आसपास विचरण करता तेंदुआ।

आबादी वाले इलाकों में बढ़ी आवाजाही

होमस्टे में घुसकर काले तेंदुए ने श्वान को बनाया शिकार

दांडेेली (उत्तर कन्नड़)। दांडेेली शहर के अंबेवाड़ी, आइ.पी.एम. क्षेत्र, टीआरटी, हसनमाल, सक्कलगा और बेडर शिरगुरु के आसपास जंगल एवं आबादी वाले क्षेत्रों में काले और धब्बेदार तेंदुओं की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।

होमस्टे में घुसा काला तेंदुआ

करीब चार-पांच दिन पहले हसनमाल स्थित एक होमस्टे में काला तेंदुआ घुस आया और एक श्वान को मार डाला। इसके बाद इसी तेंदुए को टीआरटी कॉलोनी के समीप भी देखे जाने की सूचना है। वहीं, अंबेवाड़ी स्थित वीटीयू परिसर में रात के समय धब्बेदार तेंदुए की आवाजाही भी लोगों ने देखी है। दोपहिया वाहनों से गुजर रहे लोगों को भी सडक़ किनारे तेंदुओं के दिखाई देने की बात प्रत्यक्षदर्शियों ने कही है।

अब तक इंसानों पर हमला नहीं

तेंदुओं द्वारा अब तक इंसानों पर हमला किए जाने की कोई घटना सामने नहीं आई है। हालांकि, श्वानों और मवेशियों पर हमले की घटनाएं सामने आने से चिंता बढ़ गई है। भोजन की तलाश में तेंदुओं के आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने की आशंका जताई जा रही है।

दांडेेली की दुर्लभ वन्यजीव पहचान

काला तेंदुआ कोई अलग प्रजाति नहीं है। सामान्य तेंदुए में पाए जाने वाले दुर्लभ आनुवंशिक गुण ‘मेलानिज्म’ के कारण उसका शरीर काला दिखाई देता है। पर्याप्त रोशनी में उसके शरीर पर मौजूद धब्बे भी दिखाई देते हैं। दांडेेली के जंगलों में काले तेंदुओं का दिखना यहां की समृद्ध जैव विविधता की खास पहचान माना जाता है।

काले तेंदुए को देखने के लिए वन्यजीव प्रेमी और पर्यटक दांडेेली पहुंचते हैं। ऐसे में दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण के साथ आबादी वाले क्षेत्रों में इनके कारण उत्पन्न संभावित खतरे को नियंत्रित करना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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