मां की ममता के आगे इंसान और पशु में कोई फर्क नहींकरंट की चपेट में आए बच्चे को बचाने के बाद घंटों घर के बाहर इंतजार करती रही मां बंदरिया।

करंट की चपेट में आए बच्चे को बचाने के बाद घंटों घर के बाहर इंतजार करती रही मां बंदरिया

धारवाड़। मां की ममता इंसान और पशु में भेद नहीं करती। अपने बच्चे की सलामती के लिए मां किसी भी मुश्किल का सामना कर सकती है। धारवाड़ तालुक के उप्पिनबेटगेरी गांव में मंगलवार को घटी घटना ने इस भावुक सच्चाई को फिर साबित कर दिया।

युवक ने बचाई बंदर के बच्चे की जान

धारवाड़-बैलहोंगल मार्ग पर हनुमनाल क्रॉस के पास सुबह एक बंदर का बच्चा बिजली के खंभे पर चढ़ गया और विद्युत प्रवाहित तार पकड़ लेने से करंट की चपेट में आ गया। वह खंभे पर ही लटक रहा था। राहुल बडिगेर नामक युवक ने अपनी जान की परवाह किए बिना लकड़ी की मदद से बच्चे को तार से अलग कर उसकी जान बचाई।

करंट से घबराया बच्चा पास के मल्लप्पा कुंभार के घर में जाकर छिप गया। इसी बीच उसकी मां उसे खोजते हुए वहां पहुंची। घर में बच्चा नहीं मिलने पर मां बंदरिया बेचैन हो उठी। कुछ अन्य बंदर भी उसके साथ बच्चे को खोजने लगे।

बच्चे को देखते ही सीने से लगाया

बच्चे के लिए मां बंदरिया घंटों घर के बाहर बैठी रही। लोगों ने उसे भगाने का प्रयास किया, लेकिन वह वहां से नहीं हटी। बाद में घर में तलाश करने पर बच्चा लकड़ी के खंभों के बीच डरा-सहमा मिला। खिडक़ी से बाहर निकलते ही मां बंदरिया दौडक़र उसके पास पहुंची और उसे सीने से लगा लिया। इसके बाद वह बच्चे को लेकर सुरक्षित स्थान की ओर चली गई।

मां बंदरिया का अपने बच्चे के लिए घंटों इंतजार और फिर उसे ममता से गले लगाने का दृश्य देखकर स्थानीय लोगों की आंखें भी नम हो गईं। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि मां का हृदय चाहे इंसान का हो या किसी मूक प्राणी का, उसकी ममता और संतान के प्रति प्रेम समान होता है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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