सडक़ किनारे पौधरोपण से लेकर मैंग्रोव संरक्षण तक अभियान; क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों में गैप प्लांटेशन पर जोर
उडुपी। उडुपी जिले में वन क्षेत्र बढ़ाने और हरित आवरण को मजबूत करने के लिए वन विभाग ने बड़े पैमाने पर पौधरोपण की योजना बनाई है। कुंदापुर वन विभाग के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में इस वर्ष के अंत तक 7 लाख से अधिक पौधे विकसित एवं रोपित करने का लक्ष्य रखा गया है।
कुंदापुर वन विभाग में कार्कल, वेणूरु, मूडबिद्री, बयंदूरु, शंकरनारायण, हेब्री, कुंदापुर और उडुपी सहित आठ रेंज शामिल हैं। इनमें उडुपी जिले के साथ दक्षिण कन्नड़ जिले के कुछ क्षेत्र भी आते हैं। जिले के करीब 49 से 50 प्रतिशत हिस्से में वन क्षेत्र है, जिसकी देखरेख 38 सेक्शन और 84 बीट के माध्यम से की जा रही है।
सडक़ किनारे और समुद्र तट पर पौधरोपण
वन विभाग सडक़ किनारे पौधे लगाने, समुद्र तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव (सदाबहार पेड़) विकसित करने तथा क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों में गैप प्लांटेशन के माध्यम से नए पौधे लगाने पर जोर दे रहा है।
वर्ष 2024-25 में 827.64 हेक्टेयर क्षेत्र में 3,24,110 पौधे, 2025-26 में 1,076.37 हेक्टेयर में 6,10,550 पौधे और 2026 में अब तक 946 हेक्टेयर क्षेत्र में 5,86,700 पौधे लगाए जा चुके हैं। इस वर्ष अभी दो लाख और पौधे लगाने की योजना है। वन क्षेत्र में रोपण से पहले पौधों को तैयार करने और दो वर्ष तक उनकी देखभाल पर प्रति पौधा करीब 300 रुपए खर्च होने की जानकारी दी गई है।
फलदार और उपयोगी प्रजातियों को प्राथमिकता
वन विभाग पक्षियों और वन्यजीवों के लिए भोजन उपलब्ध कराने वाली प्रजातियों के साथ मूल्यवान एवं बड़े पेड़ लगाने को प्राथमिकता दे रहा है। कटहल, हेब्बलसु, बीटे, महोगनी, सागवान, होन्ने, आंवला, अंजीर, चंदन, रक्तचंदन, आम, बांस और जामुन जैसी प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है। नदियों और समुद्र तटों पर मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए मैंग्रोव (सदाबहार पौधे) भी लगाए जा रहे हैं।
हरित क्षेत्र बढ़ाने को प्राथमिकता
जिले में हरित क्षेत्र बढ़ाना हमारी प्राथमिकता है। युवाओं में भी पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
–रुद्रेन, डीसीएफ, कुंदापुर वन विभाग
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