बिना जनसुनवाई मसौदा बनाने का आरोप
हरित क्षेत्र और सडक़-रिंग रोड के प्रस्तावों में बदलाव पर आपत्ति
शिवमोग्गा। शिवमोग्गा-भद्रावती महानगर योजना-2041 का प्रारूप नागरिक संगठनों के विरोध के घेरे में है। शिवमोग्गा नागरिक हित संरक्षण मंचों के महासंघ ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान तैयार करते समय न तो सामाजिक संगठनों से परामर्श किया गया और न ही जनता की राय ली गई। महासंघ ने चेतावनी दी कि सार्वजनिक सुनवाई के बिना योजना को अंतिम रूप दिया गया तो न्यायालय की शरण ली जाएगी।
महासंघ के महासचिव के.वी. वसंत कुमार ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रारूप नक्शा प्राधिकरण कार्यालय में छोटे आकार में लगाया गया है, जबकि वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं कराया गया। बस्तियों, सडक़ों और उनकी चौड़ाई का विवरण नहीं होने से नागरिकों को आपत्तियां दर्ज कराने में परेशानी हो रही है। उन्होंने पूरी रिपोर्ट और नक्शा सार्वजनिक करने की मांग की।
वसंत कुमार ने 200 फीट सडक़ और रिंग रोड के प्रस्तावों में बदलाव तथा छह प्रस्तावित क्षेत्रीय उद्यानों में से कई को हटाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि आलकोल में वन विभाग की 12.50 एकड़ जमीन सहित कुछ भूखंडों का उपयोग हरित क्षेत्र से बदलकर सार्वजनिक उपयोग क्षेत्र किया गया है। खेल परिसरों को हरित क्षेत्र में शामिल कर इसका अनुपात बढ़ाकर दिखाने की आशंका भी जताई।
महासंघ ने नई बस्तियों में 15 से 20 प्रतिशत जमीन वनीकरण के लिए आरक्षित करने, तुंगा और भद्रा नदियों के किनारे 100 फीट चौड़ा हरित गलियारा बनाने तथा औद्योगिक क्षेत्रों में हरित पट्टी विकसित करने की मांग की।
संगठन सचिव डॉ. सतीश कुमार शेट्टी ने कहा कि मसौदे में हरित क्षेत्र को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली है। अधिकारियों के 13 प्रतिशत हरित क्षेत्र के दावे पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
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