आयुष्मान योजना में इलाज से इनकार, 17 अस्पतालों से लौटाए पैसेआयुष्मान योजना में इलाज से इनकार, 17 अस्पतालों से लौटाए पैसे

कम पैकेज दर का हवाला देकर मरीजों को लौटाने और अतिरिक्त शुल्क लेने की शिकायतें

स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए नोटिस

हुब्बल्ली। ‘आयुष्मान भारत-आरोग्य कर्नाटक’ योजना के तहत पात्र मरीजों का उपचार करने से कुछ पंजीकृत निजी अस्पतालों द्वारा इनकार किए जाने का मामला सामने आया है। कई अस्पताल मरीजों को भर्ती किए बिना लौटा रहे हैं, जबकि कुछ अस्पताल भर्ती करने के बाद भी योजना के तहत उपचार देने के बजाय मरीजों से शुल्क वसूल रहे हैं। शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित अस्पतालों को नोटिस जारी किए हैं और कुछ पर जुर्माना भी लगाया है।

विभाग के अनुसार, 17 अस्पतालों ने मरीजों से वसूली गई राशि वापस की है। इनमें मैसूरु के अपोलो बीजीएस अस्पताल ने 6.73 लाख रुपए, बेंगलूरु के नारायण हृदयालय ने 4.31 लाख रुपए, मैसूरु के भानवी अस्पताल ने 4.14 लाख रुपए और बेलगावी के लेकव्यू हार्ट एंड सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ने 2.70 लाख रुपए लौटाए हैं। मैसूरु के नारायण मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल ने 2.14 लाख रुपए, बेंगलूरु के सागर अस्पताल ने 1.63 लाख रुपए और वैदेही अस्पताल ने 1.28 लाख रुपए वापस किए।

1,650 उपचार पैकेज योजना में

2018 में शुरू हुई योजना के तहत बीपीएल परिवारों को सालाना 5 लाख रुपए तक के उपचार की सुविधा मिलती है। राज्य में एक करोड़ से अधिक बीपीएल परिवार योजना के दायरे में हैं। 20 लाख से अधिक एपीएल परिवार भी ‘आरोग्य कर्नाटक’ के अंतर्गत हैं। एपीएल परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए अधिकतम 1.50 लाख रुपए तक के उपचार की सीमा निर्धारित है, जिसमें 30 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जाता है।

योजना में 1,650 उपचार पैकेज शामिल हैं और प्रत्येक उपचार के लिए निर्धारित दर तय है। इससे अधिक राशि वसूलने की अनुमति नहीं है। विभागीय जांच में अतिरिक्त शुल्क वसूलने के मामले सामने आने के बाद कर्नाटक निजी चिकित्सा प्रतिष्ठान अधिनियम (केपीएमइ) के तहत कार्रवाई की गई है।

पैकेज दर संशोधन की मांग

एक निजी अस्पताल के प्रमुख ने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित दर और वर्तमान उपचार लागत में बड़ा अंतर है। पैकेज दरों को संशोधित करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि दरों को वास्तविक लागत के करीब किया जाए।

स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने स्पष्ट किया कि योजना के तहत उपचार से इनकार करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में मरीज को तत्काल उपचार देना अनिवार्य है।

योजना के सामान्य प्रावधान के अनुसार लाभार्थी को पहले सरकारी अस्पताल में भर्ती होना होता है। वहां उपचार उपलब्ध न होने पर सिफारिश के आधार पर दूसरे अस्पताल में उपचार लिया जा सकता है। हालांकि सडक़ दुर्घटना सहित कुछ आपात स्थितियों में पंजीकृत निजी अस्पताल में सीधे भर्ती होने की सुविधा है।

आंकड़े एक नजर में

योजना के तहत पंजीकृत सरकारी अस्पताल – 2,965

योजना के तहत पंजीकृत निजी अस्पताल – 580

 

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By Bharat Ki Awaz

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