2.70 करोड़ का बैराज, मरम्मत के अभाव में बेकारचिक्कोबनहल्ली के पास चिन्नहगरी बड़े नाले पर बनाया गया ब्रिज-कम-बैराज।

जंग खा चुके 32 गेट, खराब रबर सील;

भूजल बढ़ाने की योजना पर विभागीय उदासीनता भारी

मोलकाल्मूरु (चित्रदुर्ग)। भूजल स्तर बढ़ाने और बारिश के पानी को रोककर उसका उपयोग करने के उद्देश्य से चिक्कोबनहल्ली के पास चिन्नहगरी बड़े नाले पर बनाया गया ब्रिज-कम-बैराज अब अपनी उपयोगिता खोता जा रहा है। 2.70 करोड़ रुपए खर्च कर बनाए गए बैराज के गेट जंग खा चुके हैं और रबर सील खराब होने से पानी लंबे समय तक नहीं टिक पा रहा है। इससे निर्माण का मूल उद्देश्य ही विफल होता दिखाई दे रहा है।

चिक्कोबनहल्ली-चिक्कुंती मार्ग के बीच वर्ष 2015 में तत्कालीन विधायक एस. तिप्पेस्वामी ने बैराज का शिलान्यास किया था। इसका उद्देश्य भूजल स्तर बढ़ाने के साथ आसपास के बागानों और बस्तियों को आवागमन सुविधा उपलब्ध कराना था। बारिश के दौरान बहकर व्यर्थ जाने वाले पानी को रोकने में भी बैराज अहम भूमिका निभा सकता था।

एक सप्ताह भी नहीं टिकता पानी

ग्राम पंचायत के पूर्व सदस्य डी.ओ. करिबसप्पा ने बताया कि बैराज में पानी जमा होने पर आसपास के बोरवेलों का जलस्तर बढ़ता और खेती को फायदा मिलता। लेकिन खराब गेट और रबर के कारण बैराज में जमा पानी अब एक सप्ताह भी नहीं टिकता।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों की बड़ी आबादी है तथा अधिकांश परिवार कृषि पर निर्भर हैं। वर्षों की मांग के बाद बैराज बना, लेकिन मरम्मत के अभाव में इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।

तीन साल से कार्ययोजना का इंतजार

ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन वर्ष पहले विधायक एन.वाई. गोपालकृष्ण ने बैराज की मरम्मत के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों ने दोबारा मौके का निरीक्षण भी नहीं किया।

150 लाख की जरूरत, बजट का इंतजार

लघु सिंचाई विभाग के अनुसार बैराज 71 मीटर लंबा है और इसमें 32 गेट हैं। इसकी जल संग्रहण क्षमता 0.64 एमक्यूएम है। गेट और रबर की मरम्मत के लिए 75-75 लाख रुपए की दो अलग-अलग कार्ययोजनाएं तैयार कर भेजी गई हैं। लेकिन अनुदान उपलब्ध नहीं होने से राशि जारी नहीं हुई है।

राशि मिलते ही मरम्मत कार्य शुरू

डीएमएफ (जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि) से बैराज की मरम्मत का प्रावधान नहीं है। विभागीय अनुदान के लिए सरकार से अनुरोध किया जाएगा। राशि मिलते ही मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा।
जी. रमेश, सहायक कार्यकारी अभियंता, लघु सिंचाई विभाग

 

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