दहेज प्रताड़ना से पत्नी की मौत, पति को 7 साल की सजासांदर्भिक फोटो।

गुलबर्गा की अदालत का फैसला

5 लाख रुपए की मांग को लेकर करता था मानसिक व शारीरिक उत्पीडऩ

कलबुर्गी. जिले में दहेज प्रताडऩा के एक मामले में अदालत ने पति को सात वर्ष की सजा सुनाई है। चौथी जिला एवं सत्र न्यायालय की सेडम पीठ ने पत्नी को मायके से 5 लाख रुपए लाने के लिए प्रताडि़त करने वाले आरोपी को दोषी करार देते हुए यह फैसला सुनाया।

अदालत के अनुसार चिंचोली तालुक के ऐनोल्ली गांव निवासी महेश को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत दोषी पाया गया। न्यायाधीश के. करण गुज्जर ने आरोपी को सात वर्ष की सजा और कुल 35 हजार रुपए जुर्माना भरने का आदेश दिया।

तेलंगाना के करनकोट गांव की प्रतिभा की शादी महेश से हुई थी। विवाह के समय तय समझौते के अनुसार 11 तोला सोना, घर, बाइक और घरेलू सामान दिया गया था। हालांकि 5 लाख रुपए देने में देरी होने पर महेश अपनी पत्नी को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताडि़त करता था।

प्रताडऩा से परेशान होकर प्रतिभा ने जहरीला पदार्थ पी लिया था। इलाज के दौरान 6 जनवरी 2016 को हैदराबाद के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इस मामले में चिंचोली पुलिस थाने में दहेज प्रताडऩा सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से अतिरिक्त सरकारी अभियोक्ता के.आर. नागराज मस्की ने पैरवी की।
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पत्नी की हत्या के आरोपी पति को 7 साल की सजा

अवैध संबंध का विरोध करने पर पत्नी की हत्या

अदालत ने सुनाया फैसला

कलबुर्गी. जिले में पत्नी की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी पति को सात वर्ष की सजा सुनाई है। चौथी जिला एवं सत्र न्यायालय की सेडम पीठ ने मुधोल थाना क्षेत्र के नाडेपल्ली गांव निवासी नरसप्पा को दोषी करार दिया।

अदालत में पेश साक्ष्यों के अनुसार नरसप्पा का अपनी सौतेली मां (पिता की दूसरी पत्नी) के साथ अवैध संबंध था। इस संबंध का विरोध उसकी पत्नी माणेम्मा ने किया था।

बताया गया कि 25 अप्रेल 2022 को नरसप्पा ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी और इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। इस मामले में मुधोल पुलिस थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया था।

मामले की जांच तत्कालीन सीपीआई संदीपसिंह मुरगोड ने की और अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के बाद न्यायाधीश के. करण गुज्जर ने आरोपी को सात वर्ष की सजा और 25 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

इस मामलों में सरकारी पक्ष की ओर से अतिरिक्त सरकारी अभियोक्ता के.आर. नागराज मस्की ने पैरवी की।

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By Bharat Ki Awaz

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