भद्रा नहर के अंतिम छोर तक नहीं पहुंचता पानीभद्रा उपनहर में पानी के प्रवाह को रोकता कचरा।

4 हजार एकड़ जमीन सिंचाई से वंचित

नहरों की बदहाल स्थिति, अवैध पंपसेट और रखरखाव की कमी से किसानों की चिंता बढ़ी

दावणगेरे. हर साल गर्मी का मौसम आते ही भद्रा बेसिन क्षेत्र के अंतिम छोर के किसानों की चिंता बढ़ जाती है। जलाशयों में पर्याप्त पानी होने के बावजूद नहरों के अंतिम हिस्सों तक पानी नहीं पहुंचता। इससे हजारों एकड़ कृषि भूमि सिंचाई से वंचित रह जाती है और गर्मी के मौसम में धान की खेती किसानों के लिए केवल एक सपना बनकर रह जाती है।

भद्रा सिंचाई परियोजना के अंतर्गत आने वाले अधिकांश किसान धान की खेती पर निर्भर हैं। मानसून अच्छा होने और जलाशय भरने की स्थिति में किसान साल में दो फसलें लेते हैं। एक फसल के लिए औसतन 110 दिनों तक नहरों में पानी छोड़ा जाता है। लेकिन इस बार गर्मी की फसल के लिए पानी छोड़े जाने के दो महीने बाद भी कई नहरों के अंतिम हिस्सों तक पानी नहीं पहुंच पाया है। इससे किसानों में भारी नाराजगी और चिंता है।

किसानों के अनुसार नहरों की जर्जर हालत इस समस्या का प्रमुख कारण है। कई जगह नहरों के तटबंध टूट चुके हैं, जिससे पानी रिस कर बर्बाद हो जाता है। जगह-जगह गाद, कचरा और झाडिय़ां जमा हो जाने से पानी का प्रवाह बाधित हो रहा है। इसके अलावा नहर के ऊपरी हिस्सों में कुछ किसानों द्वारा अवैध रूप से पंपसेट लगाकर पानी उठाने के कारण भी अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता। किसानों का आरोप है कि इन कारणों से करीब 4,000 एकड़ कृषि भूमि नहर के पानी से वंचित रह गई है।

हरिहर तालुक के भानुवल्ली, वासन, कदरनायकनहल्ली और कमलापुर जैसे गांवों की नहरों में पानी नहीं पहुंचा है। वहीं बेनकनहल्ली से लेकर होन्नाली तक कई गांवों में यही समस्या बनी हुई है। कम्मारगट्टे, बेलिमल्लूर, गोल्लरहल्ली और कोटे मल्लूर जैसे गांवों के किसान भी इसी संकट का सामना कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि देवर बेलकेरे पिकअप जलाशय में पर्याप्त पानी होने के बावजूद निचले हिस्सों तक पानी पहुंचाने में प्रशासनिक व्यवस्था विफल रही है।

जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

किसानों का आरोप है कि अव्यवस्थित जल प्रबंधन और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण दशकों पुरानी यह समस्या आज भी बनी हुई है। उनका कहना है कि यदि नहरों का समुचित आधुनिकीकरण, नियमित मरम्मत और अवैध पंपसेटों पर सख्ती से कार्रवाई की जाए, तभी अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना संभव होगा और किसानों को राहत मिल सकेगी।

किसानों का कहना है कि प्रशासन के दावों के बावजूद उन्हें समय पर पानी नहीं मिल रहा है।

धान की खेती करना मुश्किल

किसान पालाक्ष ने कहा कि कमलापुर और होलेसिरिगेरे के पास की नहरों में पिछले एक-दो दिनों से पानी पहुंचा है। लेकिन मुख्य नहर में पानी छोड़े जाने के दो महीने बाद यदि अंतिम हिस्सों तक पानी पहुंचेगा, तो धान की रोपाई कैसे संभव होगी? बचे हुए 50 दिनों में धान की खेती करना मुश्किल है।

फिलहाल पानी की कोई समस्या नहीं

नहर क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू की गई है। तहसीलदार, एसी, डीवाईएसपी, बेस्कॉम और जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों की टीम निगरानी कर रही है। हर सोमवार, बुधवार और शनिवार वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समीक्षा बैठक की जा रही है। रात में अवैध रूप से पानी छोडऩे वाले तीन कर्मचारियों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। अंतिम हिस्से के 250 एकड़ क्षेत्र में पानी नहीं पहुंचने की शिकायत थी, वहां भी पानी पहुंचाने के लिए कदम उठाए गए हैं। इस बार अंतिम छोर काडज्जी तक भी पानी पहुंचा है और फिलहाल पानी की कोई समस्या नहीं है।
जी.एम. गंगाधरस्वामी, जिलाधिकारी, दावणगेरे

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By Bharat Ki Awaz

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