10 महीने बाद भी जेसीबी किराया और श्रमिकों की मजदूरी बकाया
जिम्मेदारी को लेकर भ्रम की स्थिति
धर्मस्थल (मेंगलूरु). धर्मस्थल गांव में कथित शव दफनाए जाने के मामले की जांच के दौरान काम करने वाले मजदूरों और जेसीबी मालिकों को अब तक भुगतान नहीं मिलने का मामला सामने आया है। राज्य सरकार की ओर से गठित एसआईटी की जांच में 17 स्थानों पर खुदाई कर तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में मजदूरों और जेसीबी मशीनों की सेवाएं ली गई थीं।
वर्ष 2025 में एसआईटी टीम ‘मास्क मैन’ चिन्नय्या को घटनास्थलों पर लेकर गई थी, जहां उसके बताए स्थानों पर खुदाई कर जांच की गई। शुरुआत में मानव श्रम से खुदाई का काम किया गया, लेकिन कठिनाई बढऩे पर जेसीबी मशीनें मंगाई गईं। कई दिनों तक मजदूरों और मशीनों की मदद से तलाशी अभियान जारी रहा।
71 हजार का बिल, भुगतान अब तक नहीं
जेसीबी मालिकों का कहना है कि उन्होंने केवल कार्य किए गए घंटों का हिसाब लगाकर 71,500 रुपए का बिल जमा किया था, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ। कई बार मशीनों को “जरूरत पड़ सकती है” कहकर खाली खड़ा रखा गया, जिसका कोई अतिरिक्त शुल्क भी नहीं जोड़ा गया। इसके बावजूद भुगतान लंबित है।
मजदूरों की मजदूरी भी बकाया
तलाशी अभियान के दौरान विभिन्न पंचायत क्षेत्रों से प्रतिदिन 10 से 12 मजदूर बुलाए गए थे। मजदूरों का कहना है कि करीब 80 हजार रुपए से अधिक की मजदूरी अब तक नहीं मिली है और वे अपने मेहनताना के लिए भटक रहे हैं।
इसके अलावा शामियाना, फावड़ा, कुदाल, अन्य उपकरणों और भवन किराए सहित करीब 2 लाख रुपए का भुगतान भी लंबित बताया जा रहा है।
भुगतान की जिम्मेदारी पर उलझन
स्थानीय पंचायत को एसआईटी के लिए मजदूर, जेसीबी और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। पंचायत अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी जांच का खर्च पंचायत नहीं उठा सकती और इसका भुगतान संबंधित जांच एजेंसी को करना चाहिए। इसी कारण बिल भुगतान को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
एसआईटी प्रमुख प्रणव मोहंती ने कहा कि उन्हें बकाया भुगतान की जानकारी नहीं है और इस मामले की जांच की जाएगी। वहीं पुत्तूर की सहायक आयुक्त स्टेला वर्गीज ने कहा कि एसआईटी जांच के लिए आवश्यक धनराशि सरकार उपलब्ध कराती है और उनका विभाग केवल अभियान का हिस्सा बनकर कार्य कर रहा था।
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