लंबे समय से उठ रही मांग पर विभाग ने लिया निर्णय
प्रशासनिक समस्याओं के समाधान की उम्मीद
दावणगेरे. भौगोलिक रूप से दावणगेरे जिले में स्थित होने के बावजूद वन विभाग के भद्रावती प्रभाग के अधीन आने वाले चन्नगिरी तालुक के वन क्षेत्रों को दावणगेरे वन प्रभाग में शामिल करने की प्रक्रिया आखिरकार शुरू हो गई है। तालुक के लोगों की लंबे समय से उठ रही मांग को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने इस दिशा में पहल की है।
वर्तमान में दावणगेरे, जगलूर, हरिहर, होन्नाली और आंशिक रूप से न्यामति तालुक दावणगेरे वन प्रभाग के अंतर्गत आते हैं। जबकि चन्नगिरी तालुक भद्रावती वन प्रभाग के अधीन है और न्यामति तालुक के कुछ वन क्षेत्र शिवमोग्गा और सागर वन प्रभागों के अंतर्गत आते हैं। जिले का वन क्षेत्र अलग-अलग प्रभागों में बंटा होने के कारण प्रशासनिक कार्यों में कई प्रकार की दिक्कतें सामने आ रही थीं।
जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की समस्याओं को देखते हुए विधायक बसवराजु शिवगंगा और जिला प्रभारी मंत्री एस.एस. मल्लिकार्जुन ने वन मंत्री ईश्वर खंड्रे से चन्नगिरी तालुक के वन क्षेत्रों को दावणगेरे प्रभाग में शामिल करने का अनुरोध किया था। इसके बाद विभाग ने इस दिशा में प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
वर्तमान में बल्लारी वन सर्कल के अंतर्गत आने वाले दावणगेरे वन प्रभाग में लगभग 26,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। वहीं पश्चिमी घाट की सीमा पर स्थित चन्नगिरी तालुक में ही लगभग 23,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र मौजूद है। यदि चन्नगिरी तालुक को दावणगेरे वन प्रभाग में शामिल किया जाता है तो प्रभाग का कुल वन क्षेत्र बढक़र लगभग 49,000 हेक्टेयर हो जाएगा। इसके अलावा यदि न्यामति तालुक के कुछ वन क्षेत्रों को भी इसमें जोड़ा जाता है तो दावणगेरे वन प्रभाग का दायरा और अधिक विस्तृत हो सकता है।
दावणगेरे वन प्रभाग के उप वन संरक्षक पी.एन. हर्षवर्धन के अनुसार चन्नगिरी तालुक के जोलदाल क्षेत्र में घना वन क्षेत्र है और सूलकेरे क्षेत्र में भी समृद्ध वन संपदा पाई जाती है। इन क्षेत्रों में तेंदुओं सहित कई वन्यजीवों की उपस्थिति है। उनका कहना है कि इन वन क्षेत्रों को दावणगेरे प्रभाग में शामिल करने से प्रशासनिक दृष्टि से कामकाज अधिक सुगम हो जाएगा।
वर्तमान व्यवस्था के कारण चन्नगिरी तालुक के लोगों को वन विभाग से संबंधित कार्यों के लिए शिवमोग्गा जिले के भद्रावती कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जबकि राजस्व विभाग दावणगेरे जिले के अंतर्गत आता है, जिससे दोनों विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण कई प्रशासनिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार निजी भूमि पर मौजूद पेड़ काटने के लिए भी लोगों को भद्रावती वन प्रभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। इस जानकारी के अभाव में कई लोग दावणगेरे वन प्रभाग से संपर्क करते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
इसके अलावा भूमि अधिकार से जुड़े मामलों में भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्षों पहले सरकार द्वारा दी गई दरखास्त भूमि या बगर हुकूम खेती से संबंधित मामलों में राजस्व और वन विभाग के बीच समन्वय की कमी के कारण कई आवेदन लंबित पड़े हैं।
वन विभाग ने जिले में लगभग 5,000 एकड़ से अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण की पहचान की है, जिसमें सबसे अधिक मामले चन्नगिरी तालुक में हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि चन्नगिरी को दावणगेरे वन प्रभाग में शामिल किया जाता है तो अतिक्रमण हटाने और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।
लंबे समय से उठ रही थी मांग
चन्नगिरी तालुक को दावणगेरे वन प्रभाग में शामिल करने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। जनप्रतिनिधियों के अनुरोध पर इस प्रक्रिया को शुरू किया गया है।
–पी.एन. हर्षवर्धन, उप वन संरक्षण अधिकारी, दावणगेरे वन प्रभाग

