पश्चिम एशिया युद्ध का असर: चावल मिलें संकट मेंगोदाम में जमा चावल की बोरियां।

निर्यात ठप होने से भंडारण बढ़ा, कीमतों में गिरावट

मिल मालिकों पर बढ़ा आर्थिक दबाव

कोप्पल. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब राज्य के चावल उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। निर्यात बाधित होने के कारण चावल मिल मालिक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

हर वर्ष दिसंबर और जनवरी में उत्पादित चावल को तीन-चार महीनों के भीतर विदेशों में निर्यात किया जाता था। लेकिन इस बार ईरान में चल रहे युद्ध और खाड़ी देशों पर उसके प्रभाव के चलते निर्यात ठप हो गया है। कई जगहों पर बंदरगाहों तक पहुंचा चावल वहीं अटका हुआ है, जबकि कुछ स्थानों से लदे ट्रक वापस लौट आए हैं।

एक ओर गोदामों में पहले से भंडारण बढ़ा हुआ है, वहीं अगले एक महीने में नई फसल आने वाली है। इससे मिल मालिकों पर पुराना स्टॉक जल्द निकालने का दबाव बढ़ गया है।

तुंगभद्रा सिंचाई क्षेत्र के अंतर्गत कोप्पल, विजयनगर, बल्लारी और रायचूर जिलों में उत्पादित सोना मसूरी चावल की विदेशों में भारी मांग रहती है। मिल मालिक पहले ही किसानों से धान खरीदकर भुगतान कर चुके हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति और कमजोर हो गई है।

राज्य में लगभग 4 हजार चावल मिलें हैं, जहां श्रमिकों का वेतन और बिजली बिल चुकाना भी मुश्किल हो रहा है। भंडारण अधिक होने से कीमतों में गिरावट आई है। व्यापारियों के अनुसार, पुराना सोना मसूरी चावल 5400-5600 प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि नया चावल इससे करीब 200 सस्ता है।

मिल मालिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्यात की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।

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By Bharat Ki Awaz

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