आधुनिक युग में भी बरकरार कुश्ती का जलवाउप्पिनबेटगेरी में जत्रा महोत्सव के तहत आयोजित खुले दंगल प्रतियोगिता में दमखम दिखाते पहलवान।

उप्पिनबेटगेरी में जत्रा महोत्सव के तहत तीन दिवसीय पारंपरिक दंगल, सैकड़ों पहलवानों ने दिखाया दमखम

धारवाड़। आधुनिक दौर में जहां खेलों के स्वरूप तेजी से बदल रहे हैं, वहीं पारंपरिक भारतीय खेल कुश्ती आज भी अपनी पहचान और लोकप्रियता बनाए हुए है। इसका जीवंत उदाहरण तालुक के उप्पिनबेटगेरी गांव में श्रीगुरु विरूपाक्षेश्वर जत्रा महोत्सव के तहत आयोजित तीन दिवसीय खुले दंगल (बयलु कुश्ती) प्रतियोगिता में देखने को मिला।

प्रतियोगिता के अंतिम दिन गुरुवार को स्थानीय मूरुसाविर विरक्त मठ के कुमार विरूपाक्ष स्वामी ने दंगल का शुभारंभ किया और पहलवानों का उत्साहवर्धन किया। छोटे बच्चों से लेकर युवा पहलवानों तक ने अपने-अपने दांव-पेच और कौशल का शानदार प्रदर्शन किया।

दर्शकों का जबरदस्त उत्साह

दंगल में उपस्थित कुश्ती प्रेमियों ने तालियों, सीटियों और जोरदार नारों के साथ पहलवानों का उत्साह बढ़ाया। तीन दिनों तक चले इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि पारंपरिक कुश्ती की लोकप्रियता आज भी गांवों में कायम है और यह खेल लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखता है।

कई क्षेत्रों से पहुंचे पहलवान

इस प्रतियोगिता में धारवाड़, बेलगावी, गोकाक, रायबाग, लक्कुंडी, कोगिलगेरी, हिरेहोन्नल्ली, नरेंद्र, पुडकलकट्टी, कल्लूर, करडिगुड्ड और लोकूर समेत विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों पहलवान शामिल हुए।

पहलवानों ने अपने दमदार प्रदर्शन से दर्शकों को रोमांचित किया और कुश्ती कला की जीवंत परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया।

रंपरा और खेल का संगम

इस तरह के आयोजनों से न केवल ग्रामीण खेलों को बढ़ावा मिलता है, बल्कि युवाओं में पारंपरिक खेलों के प्रति रुचि भी बढ़ती है। उप्पिनबेटगेरी का यह दंगल एक बार फिर साबित करता है कि आधुनिकता के बीच भी देशी खेलों की पहचान और आकर्षण बरकरार है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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