3 साल की जेल और 30 हजार रुपए जुर्माना, सहयोगी भी दोषी करार
धारवाड़. सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए फर्जी अंकपत्र का सहारा लेना एक युवक को भारी पड़ गया। न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी और उसके सहयोगी दोनों को तीन-तीन वर्ष के कारावास और 30-30 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और कानून के प्रति सख्ती का स्पष्ट संदेश देता है।
मामले के अनुसार, हावेरी जिले के हानगल तालुक के वरूर गांव निवासी श्रीमंद्र वसंत वरूर ने द्वितीय पीयूसी (12वीं) की अपनी अंकतालिका में हेरफेरी कर ग्राम लेखाकार (विलेज अकाउंटेंट) की नौकरी प्राप्त की थी। वास्तविक परीक्षा में उसे कुल 301 अंक प्राप्त हुए थे, लेकिन उसने फर्जी दस्तावेज के जरिए अंक बढ़ाकर 529 दर्शाए। इस जालसाजी में हानगल तालुक के ही बालंबीड निवासी नारायण बसप्पा करेव्वनवर ने उसकी सहायता की थी।
दोनों आरोपियों ने मिलकर नकली अंकपत्र तैयार किया और उसे सरकारी प्रक्रिया में प्रस्तुत कर नौकरी हासिल कर ली। यह धोखाधड़ी लंबे समय तक छिपी रही, लेकिन बाद में मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने जांच शुरू की।
धारवाड़ उपनगर पुलिस थाना के पीएसआई आर.डी. नीलण्णवर ने मामले की विस्तृत जांच कर आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य जुटाए और न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। इसके बाद अदालत में गवाहों के बयान और साक्ष्यों की गहन पड़ताल की गई।
सुनवाई पूरी होने के बाद जेएमएफसी न्यायालय के न्यायाधीश अविनाश गाली ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास और 30,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक सरकारी अभियोजक वाई.जे. सनबसन्नवर ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा, जिससे मामले में दोष सिद्ध हुआ।
यह फैसला उन लोगों के लिए चेतावनी है जो शॉर्टकट अपनाकर सरकारी नौकरी पाने की कोशिश करते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी हासिल करना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि समाज और व्यवस्था के साथ विश्वासघात भी है।
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